विशेष रिपोर्ट

लड़की को कॉल गर्ल कहना आत्महत्या के लिए उकसाना नहीं माना जा सकता : सुप्रीम कोर्ट ने कहा

लड़की को कॉल गर्ल कहना आत्महत्या के लिए उकसाना नहीं माना जा सकता : सुप्रीम कोर्ट ने कहा

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि किसी लड़की को 'कॉल गर्ल' कहना आत्महत्या के लिए उकसाना नहीं माना जा सकता है. सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका को खारिज करते हुए कहा,''यह नहीं माना जा सकता है कि आत्महत्या का कारण अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल था.'' जस्टिस इंदु मल्होत्रा और जस्टिस आर सुभाष रेड्डी की पीठ ने कहा कि गुस्से में कहे गए एक शब्द को, जिसके परिणाम के बारे में कुछ सोचा-समझा नहीं गया हो, उकसावा नहीं माना जा सकता है.

सुप्रीम कोर्ट ने ताजा मामले में पुराने फैसले का हवाला देते हुए कहा, ''इसी फैसले के मुताबिक हमारा विचार है कि इस तरह का आरोप आईपीसी की धारा 306/34 के तहत दोष मढ़कर कार्यवाही की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिहाज से पर्याप्त नहीं है. इस आरोप से यह भी स्पष्ट है कि आरोपियों में से किसी ने भी पीड़िता को आत्महत्या के लिए न तो उकसाया, न बहलाया-फुसलाया और न उस पर दबाव बनाया.''

सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक पुराने फैसले में एक व्यक्ति को अपनी पत्नी को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप से मुक्त कर दिया था. पति ने झगड़े के दौरान पत्नी से कहा था कि 'जाकर मर जाओ'. आत्महत्या के लिए उकसाने पर 10 साल तक की जेल का प्रावधान है.

साल 2004 में कोलकाता की एक लड़की अंग्रेजी सीखने के लिए एक टीचर के पास गई. युवती और टीचर को एक दूसरे से प्यार हो गया. दोनों ने शादी का फैसला किया. लेकिन जब लड़की अपने टीचर के घर गई तो टीचर के माता पिता ने लड़की को डांटा और 'कॉल गर्ल' तक कह दिया. लड़की के पिता की तरफ से दी गई शिकायत के मुताबिक, टीचर ने इस दौरान अपने पिता के गाली-गलौच का विरोध तक नहीं किया, जिसकी वजह से लड़की परेशान रहने लगी. लड़की ने इस घटना के अगले दिन खुदकुशी कर ली. लड़की ने दो सुसाइड नोट में लिखे, जिसमें उसने कहा कि उसे कॉल गर्ल कहा गाया और इस दौरान जिस आदमी से वह प्यार करती थी, उसने कुछ नहीं कहा. जांच के बाद पुलिस ने टीचर और उसके पिता समेत तीन लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की. तीनों आरोपियों ने इसके खिलाफ ट्रायल कोर्ट में याचिका दाखिल की लेकिन अदालत ने याचिका खारिज कर दी. जिसके बाद तीनों आरोपियों ने कलकत्ता हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की, जहां उन्हें राहत मिली. जिसके बाद पुलिस ने हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की.

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