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बिजली सी रफ्तार! हाई-स्पीड ट्रेन ने 5.3 सेकंड में छुआ 800 किमी/घंटा का आंकड़ा

Posted on :16-Jul-2026
बिजली सी रफ्तार! हाई-स्पीड ट्रेन ने 5.3 सेकंड में छुआ 800 किमी/घंटा का आंकड़ा

बीजिंग : दुनिया भर में हाई-स्पीड रेल तकनीक को लेकर प्रतिस्पर्धा लगातार तेज होती जा रही है। एक तरफ भारत अपने रेल नेटवर्क को आधुनिक बनाते हुए सेमी हाई-स्पीड और बुलेट ट्रेन परियोजनाओं को तेजी से गति दे रहा है, वहीं दूसरी तरफ चीन ने मैग्लेव तकनीक के क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल करने का दावा किया है। चीन के वैज्ञानिकों ने चुंबकीय तकनीक से संचालित एक हाई-स्पीड मैग्लेव ट्रेन मॉडल को महज 5.3 सेकंड में 800 किलोमीटर प्रति घंटे की अविश्वसनीय रफ्तार तक पहुंचाकर नया विश्व रिकॉर्ड बनाने का दावा किया है। यह गति भारत में प्रस्तावित बुलेट ट्रेन की संभावित रफ्तार से करीब तीन गुना अधिक है।

रिपोर्ट के अनुसार, चीन के हुबेई प्रांत स्थित ईस्ट लेक लेबोरेटरी के वैज्ञानिकों ने 1110 किलोग्राम वजनी हाई-स्पीड रेल मॉडल का यह सफल परीक्षण किया है। इस अनूठे परीक्षण में ट्रेन को पारंपरिक पहियों के बजाय चुंबकीय उत्तोलन यानी मैग्नेटिक लेविटेशन (मैग्लेव) तकनीक की मदद से ट्रैक के ऊपर हवा में तैराया गया और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक प्रोपल्शन सिस्टम के जरिए बेहद तेज गति प्रदान की गई। वैज्ञानिकों का कहना है कि पिछले छह महीनों के भीतर इसी परीक्षण प्लेटफॉर्म पर बनाया गया यह तीसरा विश्व रिकॉर्ड है।

इस सफल परीक्षण के बाद लगभग एक महीने तक विभिन्न तकनीकी मानकों की बारीकी से जांच की गई, जिसमें अधिकतम गति की सटीकता, हाई-स्पीड लेविटेशन की स्थिरता, ऊर्जा दक्षता और पूरे सिस्टम की विश्वसनीयता का मूल्यांकन शामिल था। शोधकर्ताओं के अनुसार, सभी परीक्षण निर्धारित डिजाइन मानकों के अनुरूप पूरी तरह सफल रहे हैं।

इनोवेशन सेंटर के निदेशकों के मुताबिक, इस एक किलोमीटर लंबी हाई-स्पीड मैग्लेव परीक्षण लाइन को विशेष रूप से 800 किलोमीटर प्रति घंटे की गति के लिए विकसित किया जा रहा है। इससे पहले इसी केंद्र ने 1030 किलोग्राम वजनी मैग्लेव मॉडल को 650 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार तक पहुंचाने का दावा किया था। दूसरी ओर, भारत भी हाई-स्पीड रेल नेटवर्क के विस्तार की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

मुंबई और अहमदाबाद के बीच देश की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना पर काम जारी है, जिसकी अधिकतम गति 250 से 300 किलोमीटर प्रति घंटे रहने की संभावना है। इसके अलावा भारतीय रेलवे वंदे भारत जैसी सेमी हाई-स्पीड ट्रेनों का सफल संचालन कर रहा है, जिनकी गति को भविष्य में 180 से 200 किलोमीटर प्रति घंटे तक बढ़ाने की योजना है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तकनीक के विस्तार से लंबी दूरी की यात्रा का समय काफी घटेगा।(एजेंसी)

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US Sea Drone Attack: समुद्र में बदलती जंग की तस्वीर, भारत के लिए कितनी बड़ी चुनौती?

Posted on :16-Jul-2026
US Sea Drone Attack: समुद्र में बदलती जंग की तस्वीर, भारत के लिए कितनी बड़ी चुनौती?

नई दिल्ली : अमेरिका ने हाल ही में युद्ध में पहली बार समुद्री ड्रोन (अनमैन्ड सरफेस वेसल्स -यूएसवी) का इस्तेमाल करते हुए ईरान में भारी तबाही मचा दी है। 13 जुलाई को यूएस सेंट्रल कमांड (सैटकॉम) ने पुष्टि की कि तीन सारोनिक कोर्सेर नामक मानवरहित सतही वाहनों ने ईरान के बंदर अब्बास नेवल बेस पर स्थित पनडुब्बी और जहाज-रखरखाव सर्विस सेंटर को नष्ट किया। यह हमला वन-वे अटैक रणनीति का पहला युद्धकालीन उपयोग था, जहाँ लड़ाकू विमानों के साथ समुद्री ड्रोन का समन्वय कर ईरान के हवाई रक्षा प्रणाली और नौसैनिक संपत्तियों को निशाना बनाया गया।

मानवरहित सतही वाहन (यूएसवी) ऐसी नावें या छोटे जहाज होते हैं जिसमें कोई मानवीय चालक दल सवार नहीं होता। इन्हें मीलों दूर स्थित बेस या बड़े नौसैनिक जहाज पर बैठे ऑपरेटर्स सैटेलाइट या रेडियो लिंक के जरिए नियंत्रित करते हैं। आधुनिक यूएसवी में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सेंसर्स लगे होते हैं, जो उन्हें खुफिया जानकारी जुटाने, निगरानी रखने, लॉजिस्टिक्स और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध के साथ-साथ सीधे हमले के लिए भी उपयुक्त बनाते हैं। सारोनिक कोर्सेर एक 24 फुट का यूएसवी है जिसकी पेलोड क्षमता 1,000 पाउंड, रेंज 1,000 नॉटिकल मील से अधिक और गति 35 नॉट से ज्यादा है।

बंदर अब्बास हमले ने साफ किया हैं कि कैसे एक छोटी और अपेक्षाकृत सस्ती नाव भी दुश्मन के क्रू को खतरे में डाले बिना या बड़े युद्धपोत को जोखिम में डाले बिना सुरक्षित ठिकानों की सुरक्षा घेराबंदी को भेदकर बड़ा नुकसान पहुंचा सकती है। अमेरिकी नौसेना ने दिसंबर 2025 में सारोनिक को 392 मिलियन डॉलर का उत्पादन अनुबंध दिया था।

अमेरिका द्वारा समुद्री ड्रोन के सफल उपयोग के बाद, पाकिस्तान भी अपनी नौसेना के लिए इसतहर के मानवरहित सतही वाहन (यूएसवी) और स्वायत्त अंडरवाटर वाहन (एयूवी) विकसित कर रहा है। पाकिस्तान का उद्देश्य अरब सागर में भारतीय नौसेना या किसी अन्य चुनौती के खिलाफ कम लागत पर अपनी तटीय घेराबंदी को मजबूत करना है।

हालांकि, उसकी उत्पादन क्षमता और इन ड्रोन की परिचालन भूमिका पर गंभीर सवाल बने हुए हैं। पाकिस्तान के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि यदि भविष्य में कोई दुश्मन देश उसके मुख्य बंदरगाहों जैसे कराची या ग्वादर पोर्ट पर इसी तरह के घातक सी-ड्रोन से हमला करता है, तब पाकिस्तान उन्हें कैसे रोकेगा। ईरान की बंदर अब्बास में नाकामी यह दर्शाती है कि पारंपरिक तटीय सुरक्षा प्रणालियाँ इन छोटे और तेज ड्रोन्स को रोकने में अप्रभावी हो सकती हैं।

पाकिस्तानी विशेषज्ञों को इस बात की भी चिंता है कि यदि युद्ध के दौरान भारतीय नौसेना ने जीपीएस जैमिंग कर दी या पाकिस्तान के कमांड सेंटर और ड्रोन के बीच संचार लिंक काट दिया, तब करोड़ों रुपये के ये ड्रोन पानी में अंधे और बेकार हो जाएंगे। पाकिस्तान के सामने अपने ड्रोन को जैमिंग जैसे खतरों से सुरक्षित बनाने और वास्तविक युद्ध में उनका प्रभावी ढंग से तालमेल बिठाने की बड़ी चुनौती है।(एजेंसी)

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सैटेलाइट इमेज में दिखी हलचल, क्या समझौते के तुरंत बाद परमाणु कार्यक्रम आगे बढ़ा रहा था ईरान?

Posted on :11-Jul-2026
सैटेलाइट इमेज में दिखी हलचल, क्या समझौते के तुरंत बाद परमाणु कार्यक्रम आगे बढ़ा रहा था ईरान?

The United States and Iran : अमेरिका और ईरान के बीच गहराते युद्ध के बीच एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आई है। ताजा सैटेलाइट तस्वीरों ने यह आशंका पैदा कर दी है कि ईरान ने जून के आखिर में अमेरिका के साथ हुए 14-सूत्रीय 'सहमति पत्र' (MoU) पर दस्तखत करने के चंद दिनों बाद ही उसका उल्लंघन करना शुरू कर दिया था। इस समझौते के तहत तेहरान ने भरोसा दिया था कि वह परमाणु हथियार बनाने की कोशिश नहीं करेगा।

CNN की एक इनवेस्टिगेटिव रिपोर्ट के मुताबिक, 'इंस्टीट्यूट फॉर साइंस एंड इंटरनेशनल सिक्योरिटी' के साथ मिलकर किए गए सैटेलाइट तस्वीरों के विश्लेषण से पता चलता है कि ईरान अपने संदिग्ध परमाणु ठिकानों को फिर से बना रहा है। यह खुलासा ऐसे समय में हुआ है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस युद्धविराम समझौते को "खत्म" घोषित कर चुके हैं और इस हफ्ते की शुरुआत में ईरान पर भीषण बमबारी के आदेश दिए थे।

इन तस्वीरों के सामने आने के बाद अब यह बहस तेज हो गई है कि क्या मौजूदा सैन्य टकराव से पहले ही ईरान ने समझौते की पीठ में छुरा घोंप दिया था।

सैटेलाइट तस्वीरों में क्या दिखा?

रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के दो सबसे प्रमुख संदिग्ध ठिकानों पर रहस्यमयी हलचल देखी गई है:

1. पारचिन साइट

यह वही जगह है जहां परमाणु हथियारों से जुड़े विस्फोटक मटीरियल रखे होने का शक है।

इस साल की शुरुआत में जब अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान पर संयुक्त सैन्य हमला किया था, उससे ठीक पहले ईरान ने इस ठिकाने के चारों तरफ एक मजबूत कंक्रीट की ढाल खड़ी की थी।

अमेरिकी हमलों में इस ठिकाने को भारी नुकसान पहुंचा था। जून और जुलाई की नई सैटेलाइट तस्वीरें दिखाती हैं कि वहां दोबारा निर्माण कार्य शुरू हो चुका है। जून में, जब यह समझौता लागू था, तब ईरान ने हवाई हमलों से हुए गड्ढों को अस्थाई कवर से छिपा दिया था। जुलाई आते-आते इन कवर्स की जगह पर लोहे की जालियां लगा दी गईं, जो साफ इशारा करती हैं कि वहां रिपेयरिंग का काम जोर-शोर से चल रहा था।

2. पिकैक्स माउंटेन

यह पहाड़ी इलाका भी ईरान के परमाणु कार्यक्रम का एक बेहद गुप्त और अहम हिस्सा माना जाता है। पिछले महीने, यानी समझौता होने के ठीक बाद की तस्वीरों में दिख रहा है कि इस पहाड़ के भीतर बनीं सुरंगों में कई संदिग्ध गाड़ियां लगातार आ-जा रही हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि टनल के भीतर हो रही यह गतिविधि अमेरिका के साथ किए गए वादों के बिल्कुल खिलाफ है।

मिसाइल ठिकानों पर भी काम शुरू

हालांकि, रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान के मुख्य और बड़े परमाणु रिएक्टरों- इस्फहान, फोर्डो और नतांज पर फिलहाल ऐसी कोई नई हलचल नहीं दिखी है। लेकिन, सैटेलाइट इमेजरी से यह जरूर साफ हुआ है कि ईरान ने अपने मिसाइल स्टोरेज सेंटरों को ठीक करने का काम शुरू कर दिया है। अमेरिका और उसके सहयोगी देश हमेशा से ईरान की मिसाइल क्षमता पर चिंता जताते रहे हैं, और इन ठिकानों का दोबारा एक्टिव होना खतरे की घंटी है।

क्या लिखा था उस समझौते (MoU) में?

यह नई रिपोर्ट उन दावों के बीच आई है जब कुछ हफ्ते पहले दोनों देश युद्ध को खत्म करने और एक स्थाई शांति समझौते की तरफ बढ़ने के लिए राजी हुए थे। इस MoU के मुख्य बिंदु ये थे:

  • स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से व्यापारिक जहाजों को सुरक्षित रास्ता देना।
  • ईरानी बंदरगाहों से अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी हटाना।
  • समझौते में साफ लिखा था, "इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान यह पुष्टि करता है कि वह परमाणु हथियार न तो हासिल करेगा और न ही विकसित करेगा।" दोनों देश अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की देखरेख में संवर्धित सामग्री के स्टॉक को ठिकाने लगाने पर भी सहमत हुए थे।

लेकिन, अब इन नई सैटेलाइट तस्वीरों ने यह साफ कर दिया है कि ईरान शायद कभी इस समझौते को लेकर गंभीर था ही नहीं, और अमेरिका की नई सैन्य कार्रवाई से पहले ही वह गुपचुप तरीके से अपनी परमाणु शक्ति को दोबारा जिंदा करने में जुट गया था।(एजेंसी)

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जेल में भड़की हिंसा! श्रीलंका में कैदियों ने 25 लोगों को उतारा मौत के घाट

Posted on :07-Jul-2026
जेल में भड़की हिंसा! श्रीलंका में कैदियों ने 25 लोगों को उतारा मौत के घाट

- सुरक्षाकर्मियों के छीने हथियार, 100 को किया लहूलुहान

कोलंबो : श्रीलंका की सबसे हाई-सिक्योरिटी कही जाने वाली जेल में कैदियों ने कत्लेआम मचा दिया। पश्चिमी तटीय शहर नेगोम्बो स्थित इस जेल में भीषण दंगा तब और भयावह हो गया जब दंगाई कैदियों ने सुरक्षाकर्मियों से हथियार छीन लिए, जिससे स्थिति पूरी तरह नियंत्रण से बाहर हो गई। अधिकारियों द्वारा जारी प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, इस भयावह हिंसा में कम से कम पच्चीस लोगों ने अपनी जान गंवाई, जबकि सौ से अधिक कैदी और जेलकर्मी घायल हुए हैं।

रविवार को शुरू हुई यह भयावह हिंसा अगले दिन सोमवार तक भी जारी रही, इस दौरान दंगाई कैदियों ने जेल के शस्त्रागार पर कब्जा कर लिया, जिससे जेल प्रशासन के लिए हालात बेहद गंभीर हो गए। इस गंभीर स्थिति पर काबू पाने और हिंसा को रोकने के लिए पुलिस के स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) और दंगा नियंत्रण इकाइयों को तुरंत जेल में तैनात किया गया। 

इस घटना ने श्रीलंका की जेल सुरक्षा प्रणाली, उसकी क्षमता से अधिक कैदियों की संख्या और जेलों के भीतर कथित आपराधिक नेटवर्कों की उपस्थिति पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। सरकार ने संकेत दिया है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर जेल सुरक्षा व्यवस्था में व्यापक और मूलभूत सुधार किए जा सकते हैं, ताकि ऐसी त्रासदियों को भविष्य में रोका जा सके और जेलों में शांति व व्यवस्था बहाल की जा सके। यह घटना देश की आपराधिक न्याय प्रणाली और जेल प्रशासन के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती बनकर उभरी है।

इस बीच, श्रीलंका के न्याय मंत्री हर्षणा नानायक्कारा ने इस पूरे घटनाक्रम पर एक विस्तृत रिपोर्ट तलब की है, ताकि जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके। रविवार को एक मजिस्ट्रेट की देखरेख में प्रारंभिक जांच भी कराई गई, जिसने घटना की गंभीरता को रेखांकित किया। सरकार अब जेल की सुरक्षा व्यवस्था, जेलों के भीतर कथित ड्रग नेटवर्क के पनपने और क्षमता से अधिक कैदियों की भीड़भाड़ जैसी गंभीर समस्याओं की समीक्षा कर रही है।

प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि इस घातक झड़प की जड़ें जेल के भीतर सक्रिय दो प्रतिद्वंद्वी कैदी गुटों के बीच गहरे मतभेदों में थीं। अधिकारियों का मानना है कि एक गुट जेल के अंदर मादक पदार्थों की तस्करी का समर्थन करता था, जबकि दूसरा गुट इस अवैध गतिविधि का कड़ा विरोध कर रहा था। यह विवाद देखते ही देखते एक भीषण और हिंसक संघर्ष में बदल गया, जिसने जेल की शांति और व्यवस्था को पूरी तरह भंग कर दिया।

नशे की तस्करी को लेकर हुआ विवाद

लंबे और अथक अभियान के बाद ही स्थिति को आखिरकार नियंत्रित किया जा सका। हिंसा को आगे फैलने से रोकने और संभावित प्रतिशोध से बचने के लिए, अधिकारियों ने तीन प्रमुख कैदियों को तत्काल प्रभाव से पल्लानसेना प्रिजन कैंप में स्थानांतरित कर दिया। जेल प्रशासन ने स्पष्ट किया कि यह कदम भविष्य में होने वाली किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए उठाया गया था। जेल विभाग के मीडिया प्रवक्ता ए.सी. गजनायके ने पुष्टि की कि इस घटना की विस्तृत और गहन जांच के लिए एक विशेष जांच दल का गठन किया गया है। यह टीम जेल आयुक्त के सीधे निर्देश पर हिंसा के मूल कारणों, किसी भी सुरक्षा चूक और पूरी घटना की परिस्थितियों की गहनता से जांच करेगी। इसके अतिरिक्त, पुलिस ने भी अपनी ओर से एक अलग आपराधिक जांच शुरू कर दी है, ताकि दोषियों को न्याय के कटघरे में लाया जा सके।(एजेंसी)

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सिंधु जल पर बढ़ा तनाव, बिलावल भुट्टो ने भारत को दी परमाणु युद्ध की धमकी

Posted on :01-Jul-2026
सिंधु जल पर बढ़ा तनाव, बिलावल भुट्टो ने भारत को दी परमाणु युद्ध की धमकी

Pakistan News : सिंधु जल संधि को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बरकरार है। इस तनाव के बीच पाकिस्तान की ओर से लगातार उकसाने वाले बयान सामने आ रहे हैं। इसी बीच पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो-जरदारी ने भारत के साथ सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) विवाद को लेकर तीखी बयानबाजी की है। परमाणु सिद्धांत का हवाला देते हुए उन्होंने चेतावनी दी कि पाकिस्तान के जल अधिकारों को कमजोर करने का कोई भी प्रयास 'राष्ट्रीय अस्तित्व' पर हमला माना जाएगा और इससे 'राष्ट्रीय प्रतिक्रिया' हो सकती है।

बिलावल भुट्टो ने मंगलवार को इस्लामाबाद में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सेमिनार को संबोधित करते हुए कहा कि 1960 की सिंधु जल संधि को भारत द्वारा निलंबित किए जाने के बाद यह मुद्दा अब केवल पर्यावरणीय या राजनयिक नहीं, बल्कि पाकिस्तान की राष्ट्रीय सुरक्षा और अस्तित्व से जुड़ा हो गया है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के परमाणु सिद्धांत का एक प्रमुख पहलू यह है कि देश की अर्थव्यवस्था को कमजोर करने या उसके जलमार्गों पर प्रतिबंध लगाने के प्रयास उन चरम परिस्थितियों में शामिल हैं, जिनमें परमाणु प्रतिक्रिया का विकल्प खुला रखा गया है।

इस दौरान भुट्टो ने जोर देकर कहा कि अगर पाकिस्तान के जलक्षेत्र को बंद करना परमाणु युद्ध के परिदृश्य के बराबर है, तो इसे केवल पर्यावरणीय मुद्दा नहीं, बल्कि पाकिस्तान पर अस्तित्वगत हमला मानना चाहिए, जिसके लिए समग्र और सहयोगात्मक प्रतिक्रिया जरूरी है।

पानी हमारा है, रहेगा हमारा

सोमिनार में बोलेत हुए बिलावल भुट्टो ने भारत पर पानी को 'दबाव का हथियार' बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि अगर कोई सोचता है कि पाकिस्तान सिंध को सौंप देगा, तो वह पाकिस्तान को नहीं जानता। वह सिंध, पंजाब, बलूचिस्तान, खैबर पख्तूनख्वा, कश्मीर और गिलगित-बाल्टिस्तान को नहीं जानता। उन्होंने स्पष्ट किया कि हम शांति चाहते हैं, लेकिन गरिमापूर्ण शांति। हम संवाद चाहते हैं, लेकिन कानून के दायरे में। हम सह-अस्तित्व चाहते हैं, लेकिन समर्पण नहीं। पाकिस्तान अपने जल, अपनी संधि, अपनी संप्रभुता और अपने भविष्य की रक्षा करेगा। भुट्टो ने सिंधु नदी को पाकिस्तान की 'जीवन रेखा' बताते हुए कहा कि सिंधु नदी दबाव का बिंदु नहीं, सौदेबाजी का मोहरा नहीं और न ही किसी के हाथों में हथियार है। सिंधु नदी पाकिस्तान की जीवनरेखा है।

पहले भी दे चुके हैं इस तरह के बयान

गौरतलब है कि अप्रैल 2025 में भारत द्वारा पहलगाम आतंकी हमले के बाद संधि को स्थगित करने के फैसले के तुरंत बाद भी बिलावल भुट्टो ने इसी तरह की चेतावनी दी थी। उस समय उन्होंने कहा था कि सिंधु नदी हमारी है और हमारी ही रहेगी। या तो हमारा पानी बहेगा, या उनका खून। पाकिस्तान का परमाणु सिद्धांत 'विश्वसनीय न्यूनतम प्रतिरोध' से विकसित होकर 'पूर्ण-स्पेक्ट्रम प्रतिरोध' बन चुका है। पाकिस्तान 'नो फर्स्ट यूज' नीति नहीं अपनाता और अस्तित्व के लिए गंभीर खतरे की स्थिति में पहले परमाणु हथियारों के इस्तेमाल का विकल्प खुला रखता है।

यहां आपको बता दें कि सिंधु नदी पाकिस्तान की लगभग 80 प्रतिशत कृषि भूमि को सिंचाई का पानी उपलब्ध कराती है। पाकिस्तान इस संधि के तहत अपने जल अधिकारों की रक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी आवाज उठाता रहा है। इसके बावजूद उसे कोई फायदा नहीं हुआ। यही कारण है कि पाकिस्तानी नेता अब परमाणु बम तक आ गए हैं, ये जानते हुए भी कि भारत को ऐसी चेतावनी से आज तक कई फर्क नहीं पड़ा है, ना आगे पड़ेगा।(एजेंसी)

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ब्रिटेन को मिला बड़ा झटका, प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने छोड़ी कुर्सी

Posted on :22-Jun-2026
ब्रिटेन को मिला बड़ा झटका, प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने छोड़ी कुर्सी

ब्रिटेन : ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने लेबर पार्टी के भीतर बढ़ते भारी विरोध और असंतोष के बीच यह फैसला लिया है। गौरतलब है कि ब्रिटिश समाचार पत्र ‘द ऑब्जर्वर’ ने हाल ही में एक रिपोर्ट जारी की थी। इसके मुताबिक स्टार्मर सोमवार को अपने पद से हटने और नए नेतृत्व के चुनाव के लिए एक औपचारिक समय-सीमा की घोषणा कर सकते हैं। ब्रिटेन में पिछले एक दशक में सातवीं बार ऐसा हो रहा है जब प्रधानमंत्री बदला जा रहा है। यह ब्रिटिश राजनीतिक इतिहास में करीब दो सदियों में सबसे बड़ा और तीव्र नेतृत्व परिवर्तन है।

लोकप्रियता में जबर्दस्त गिरावट

साल 2024 के आम चुनाव में ऐतिहासिक जीत दर्ज करने वाले स्टार्मर की लोकप्रियता हाल के कई विवादों, घोटालों और नीतियों से पीछे हटने के कारण जनता के बीच बहुत तेजी से गिरी है। कीर स्टार्मर के राजनीतिक भविष्य पर संकट के बादल लगातार गहरे होते जा रहे थे। लेबर पार्टी के 100 से अधिक सांसदों ने खुले तौर पर उनसे पद छोड़ने या अपनी विदाई का समय तय करने की मांग उठाई थी। ब्रिटिश प्रधानमंत्री के लिए यह संकटपूर्ण स्थिति शुक्रवार को उस समय और अधिक गंभीर हो गई, जब ग्रेटर मैनचेस्टर के पूर्व मेयर और उनके धुर प्रतिद्वंद्वी एंडी बर्नहैम ने संसदीय उपचुनाव में बड़ी जीत दर्ज की। बर्नहैम की इस जीत ने उनके लिये संसद का रास्ता साफ कर दिया है, जहां से वह अब सीधे तौर पर श्री स्टार्मर के नेतृत्व को चुनौती दे सकते हैं।

तो क्या बर्नहैम बनेंगे नए पीएम?

ग्रेटर मैनचेस्टर के पूर्व मेयर बर्नहैम सोमवार को संसद सदस्य के रूप में शपथ लेने वाले हैं। यह अभी स्पष्ट नहीं है कि बर्नहैम को सर्वसम्मति से नेतृत्व सौंपा जाएगा या उन्हें किसी चुनौती का सामना करना पड़ेगा। स्टार्मर के नेतृत्व के विरोध में पिछले माह स्वास्थ्य मंत्री पद से इस्तीफा देने वाले वेस स्ट्रीटिंग ने कहा है कि यदि नेतृत्व के लिए चुनाव होता है, तो वह भी मैदान में उतरेंगे। इससे पहले, स्टार्मर के कार्यालय ने इस्तीफे की अटकलों पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया था, लेकिन व्यापार मंत्री पीटर काइल ने रविवार को कहा था कि स्टॉर्मर राजनीतिक वास्तविकताओं, चुनौतियों और अवसरों पर विचार करने के लिए समय ले रहे हैं।

रिपोर्टों के अनुसार, स्टार्मर ने कैबिनेट मंत्रियों, प्रमुख सलाहकारों, चंदा देने वाले दानदाताओं और श्रमिक संघ के नेताओं के साथ गहन विचार-विमर्श के बाद मान लिया था कि अब उनकी स्थिति इस पद पर बने रहने योग्य नहीं है। वह इस सप्ताहांत अपने ग्रामीण आवास 'चेकर्स' में अपनी पत्नी विक्टोरिया के साथ इस गंभीर राजनीतिक बदलाव को लेकर अंतिम चर्चा कर रहे थे।(एजेंसी)

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पाकिस्तान में ड्रोन स्ट्राइक से हड़कंप, अफगानिस्तान ने आतंकियों के कैंप किए तबाह

Posted on :19-Jun-2026
पाकिस्तान में ड्रोन स्ट्राइक से हड़कंप, अफगानिस्तान ने आतंकियों के कैंप किए तबाह

Major action by Afghanistan : अफगानिस्तान ने पाकिस्तान के अंदर घुसकर बड़ा हमला बोला है। ये हमले पाकिस्तान की हालिया एयरस्ट्राइक के जवाब में किए गए हैं। अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने शुक्रवार सुबह एक बयान जारी करते हुए दावा किया कि अफगानी बलों ने पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा (KPK) और बलूचिस्तान प्रांतों में इस्लामिक स्टेट खोरासान प्रोविंस (ISIS-K) के आतंकी शिविरों और ठिकानों पर सफल हमले किए हैं। तालिबान ने कहा है कि उसने आतंकी शिविरों को पूरी तरह नष्ट कर दिया है।

अफगान मंत्रालय के मुताबिक, इन आतंकी ठिकानों का इस्तेमाल अफगानिस्तान की धरती पर हमलों की योजना बनाने और उन्हें अंजाम देने के लिए किया जा रहा था। तालिबान का कहना है कि यह जवाबी कार्रवाई पिछले हफ्ते नांगरहार और पक्तिया में पाकिस्तान द्वारा किए गए घातक हवाई हमलों के बाद की गई है, जिनमें अफगान महिलाओं और बच्चों की जान चली गई थी।

इन इलाकों में किए तालिबान ने हमले

अफगान रक्षा मंत्रालय के अनुसार, ताजा हमले गुलिस्तान, शकर आब और कंबर खेल जैसे इलाकों में किए गए। ये जगहें ISIS-K द्वारा भर्ती, प्रशिक्षण और हमलों की योजना बनाने के लिए इस्तेमाल की जा रही थीं। मंत्रालय ने दावा किया कि सभी हाई-वैल्यू टारगेट्स को पूरी तरह नष्ट कर दिया गया और ऑपरेशन अफगानिस्तान की सुरक्षा के लिए जरूरी था। पाकिस्तान ने अभी तक इस दावे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। पिछले ऐसे मामलों में पाकिस्तान अक्सर इन हमलों से इनकार करता रहा है या उन्हें अस्वीकार कर देता है।

पाकिस्तान बार-बार अफगान तालिबान पर TTP (तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान) और ISIS-K जैसे समूहों को शरण देने का आरोप लगाता रहा है, खासकर KPK और बलूचिस्तान में होने वाले हमलों के लिए। अफगान तालिबान सरकार इन आरोपों से इनकार करती है और उलटा पाकिस्तान पर ISIS को समर्थन देने या उसे शरण देने का आरोप लगाती रही है। हाल के महीनों में दोनों देशों के बीच सीमा पर तनाव बढ़ा है, जिसमें पाकिस्तानी एयरस्ट्राइक्स और अफगानी जवाबी कार्रवाई शामिल हैं।

कैसे शुरू हुआ विवाद?

पाकिस्तानी वायुसेना (PAF) ने 'ऑपरेशन गजब लिल-हक' नाम से एक सैन्य अभियान के तहत संदिग्ध आतंकी ठिकानों पर सटीक हवाई हमले किए थे। इन हमलों का मुख्य निशाना तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के ठिकाने थे। पाकिस्तान ने विशेष रूप से नांगरहार, पक्तिया, काबुल और कंधार प्रांतों में मौजूद प्रमुख बुनियादी ढांचों को निशाना बनाया था।

डूरंड लाइन पर आमने-सामने की जंग

शुरुआती पाकिस्तानी बमबारी में अफगानिस्तान ने नागरिकों के मारे जाने का दावा किया था। इसके जवाब में अफगान तालिबान बलों ने बड़े पैमाने पर जमीनी हमला शुरू कर दिया। रिपोर्टों के अनुसार, तालिबान ने डूरंड लाइन के पास पाकिस्तान की कई सीमा चौकियों और सैन्य ठिकानों पर कब्जा कर लिया, जिसके बाद पाकिस्तान की ओर से भारी जवाबी हवाई और जमीनी कार्रवाई की गई। कथित तौर पर पाकिस्तानी एयरस्ट्राइक में पक्तिया में तालिबान का एक कोर मुख्यालय नष्ट हो गया। वहीं नांगरहार में कई सैन्य ठिकानों, हथियार डिपो और बॉर्डर ब्रिगेड के बुनियादी ढांचे को पाकिस्तानी विमानों द्वारा सफलतापूर्वक तबाह कर दिया गया।

हजारों लोग बेघर, कई देशों ने की मदद की पेशकश

इससे पहले पाकिस्तानी हवाई हमलों और सीमा पार झड़पों के कारण इलाके में बड़े पैमाने पर लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ा है। संयुक्त राष्ट्र (UN) की रिपोर्ट के अनुसार, पूर्वी प्रांतों में 94,000 से अधिक लोग नए सिरे से विस्थापित हुए हैं। इस दौरान दर्जनों नागरिक हताहत हुए हैं और स्वास्थ्य केंद्रों, धार्मिक स्थलों व मानवीय सहायता केंद्रों को भी काफी नुकसान पहुंचा है। सीमा पर लगातार बिगड़ते हालात को देखते हुए तुर्किये, रूस और चीन जैसे देशों ने युद्धविराम स्थापित करने और तनाव कम करने के लिए कूटनीतिक मध्यस्थता की पेशकश की है।(एजेंसी)

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अमेरिका में बड़ा विमान हादसा: बी-52 बॉम्बर गिरा, 8 की जान गई

Posted on :16-Jun-2026
अमेरिका में बड़ा विमान हादसा: बी-52 बॉम्बर गिरा, 8 की जान गई

-उड़ान भरते ही आग का गोला बना विमान

कैलिफ़ोर्निया : अमेरिका के कैलिफ़ोर्निया राज्य से मंगलवार सुबह एक भीषण विमान हादसे की खबर सामने आई है, जिसने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया है। अमेरिकी वायुसेना का सबसे भरोसेमंद और रणनीतिक विमानों में से एक, बी-52 स्ट्रैटोफोर्ट्रेस बॉम्बर, दक्षिणी कैलिफ़ोर्निया स्थित एडवर्ड्स एयर फोर्स बेस के पास उड़ान भरने के तुरंत बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस दर्दनाक हादसे में विमान में सवार सभी 8 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जिनमें अमेरिकी सेना के जवान, इंजीनियर और तकनीशियन शामिल थे।

वायुसेना के अधिकारियों के मुताबिक, यह दुर्घटना सोमवार सुबह करीब 11:20 बजे (स्थानीय समयानुसार) लॉस एंजिल्स के उत्तर में स्थित एडवर्ड्स एयर फोर्स बेस पर हुई। विमान एक नियमित परीक्षण मिशन पर था। उड़ान भरने के कुछ ही देर बाद विमान नियंत्रण खो बैठा और जमीन से टकराते ही आग का गोला बन गया। भीषण हादसे में विमान के परखच्चे उड़ गए और मलबा धूं-धूं कर जलता नजर आया। घटना के बाद सामने आए फुटेज में देखा जा सकता है कि हादसे के बाद विमान का कोई भी हिस्सा साबुत नहीं बचा था, रेगिस्तान में सिर्फ जलता हुआ मलबा दिख रहा था।

एडवर्ड्स बेस पर 412वें टेस्ट विंग के डिप्टी कमांडर, कर्नल जेम्स हेस, ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में भावुक होते हुए कहा, हमने 8 अच्छे अमेरिकियों को खो दिया है। उन्होंने बताया कि क्रैश के फुटेज देखने के बाद यह स्पष्ट हो गया था कि इस हादसे में किसी का भी जिंदा बचना असंभव था। वायुसेना के अधिकारियों ने पुष्टि की है कि विमान में सवार सभी 8 कर्मियों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। फिलहाल, दुर्घटना के कारणों का अभी तक पता नहीं चल पाया है और वायुसेना ने इसकी गहन जांच शुरू कर दी है।

बी-52 बॉम्बर यूएस की बड़ी ताकत

बोइंग का बी-52 स्ट्रैटोफोर्ट्रेस एक लंबी दूरी का रणनीतिक बॉम्बर विमान है, जो परमाणु और पारंपरिक दोनों तरह के हथियार ले जाने में सक्षम है। यह विमान वियतनाम से लेकर ईरान तक कई सैन्य अभियानों में इस्तेमाल किया जा चुका है और इसे अमेरिकी वायुसेना का रीढ़ माना जाता है। हाल के वर्षों में इसमें कई उन्नत अपग्रेड किए गए हैं, जिनमें आधुनिक रडार सिस्टम शामिल हैं, जो इसकी मारक क्षमता और प्रभावशीलता को बढ़ाते हैं।(एजेंसी)

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स्काइडाइविंग विमान हादसा: क्रैश में 12 लोगों की दर्दनाक मौत, इलाके में शोक

Posted on :15-Jun-2026
स्काइडाइविंग विमान हादसा: क्रैश में 12 लोगों की दर्दनाक मौत, इलाके में शोक

अमेरिका के मिसौरी में भीषण विमान हादस

वॉशिंगटन : अमेरिका के मिसौरी राज्य में रविवार को एक बेहद दर्दनाक विमान हादसा सामने आया है, जहां स्काइडाइविंग के लिए यात्रियों को ले जा रहा एक छोटा विमान उड़ान भरने के कुछ ही समय बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गया। बटलर मेमोरियल एयरपोर्ट के पास हुए इस भयानक हादसे में विमान में सवार सभी 12 लोगों की मौत हो गई है। यह हवाई अड्डा कैनसस सिटी से लगभग 105 किलोमीटर दक्षिण में स्थित है। अधिकारियों के मुताबिक, जमीन से टकराते ही विमान में इतनी भीषण आग लग गई कि किसी को भी संभलने का मौका नहीं मिला और मौके पर ही सभी यात्रियों ने दम तोड़ दिया।

स्थानीय सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, रविवार सुबह करीब 11:30 बजे आपातकालीन सेवाओं को विमान दुर्घटना और उसमें लगी भयंकर आग की सूचना मिली थी। राहत और बचाव दल बिना वक्त गंवाए तुरंत मौके पर पहुंचे और जलते हुए मलबे पर काबू पाया। हालांकि, जब तक आग बुझाई जा सकी, तब तक विमान पूरी तरह जलकर राख हो चुका था। सुरक्षा एजेंसियों ने इस दृश्य को बेहद भयावह और दिल दहला देने वाला बताया है। विमान एयरपोर्ट के पास ही एक खुले खेत में गिरा था, जिसके बाद एहतियात के तौर पर आसपास की सड़कों को पूरी तरह बंद कर दिया गया।

जांच रिपोर्ट के अनुसार, दुर्घटनाग्रस्त विमान का संचालन स्काइडाइव कैनसस सिटी नामक कंपनी कर रही थी। हवाईअड्डा प्रबंधन और आपदा प्रबंधन एजेंसी के अधिकारियों ने बताया कि विमान ने जैसे ही रनवे से उड़ान भरी, उसने तुरंत बाईं ओर मोड़ लिया था। शुरुआती आकलन से ऐसा प्रतीत होता है कि टेकऑफ के तुरंत बाद विमान की शक्ति या इंजन की ताकत अचानक कम हो गई थी। पायलट ने स्थिति को भांपते हुए विमान को सुरक्षित वापस उतारने की पूरी कोशिश की, लेकिन वह नियंत्रण खो बैठा। इसके बाद विमान तेजी से नीचे की ओर गिरा और जोरदार धमाके के साथ जमीन से टकरा गया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि हादसे से पहले किसी भी यात्री द्वारा विमान से छलांग लगाने या बचने के कोई संकेत नहीं मिले हैं।

सिंगल इंजन था विमान

हादसे का शिकार हुआ विमान पैसिफिक एयरोस्पेस 750एक्सएल मॉडल का एक सिंगल-इंजन टर्बोप्रॉप विमान था। इस मॉडल का उपयोग आमतौर पर स्काइडाइविंग, माल ढुलाई और हवाई सर्वेक्षण जैसी सेवाओं के लिए किया जाता है। फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (एफएए) के रिकॉर्ड के मुताबिक, इस विमान का निर्माण वर्ष 2010 में हुआ था और यह छोटे रनवे से भी उड़ान भरने में पूरी तरह सक्षम था। फिलहाल, राष्ट्रीय परिवहन सुरक्षा बोर्ड और एफएए की उच्चस्तरीय टीमें घटनास्थल पर मुस्तैद हैं और ब्लैक बॉक्स व मलबे की तकनीकी जांच के जरिए हादसे के असली कारणों का पता लगाने में जुटी हैं।(एजेंसी)

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भूकंप के तेज झटकों से दहला फिलीपींस, भारी तबाही और अफरा-तफरी

Posted on :08-Jun-2026
भूकंप के तेज झटकों से दहला फिलीपींस, भारी तबाही और अफरा-तफरी

भूकंप के बाद सुनामी का अलर्ट, एक की मौत

दावो : फिलीपींस के दक्षिणी तट के पास सोमवार को सुबह-सुबह भूकंप के बेहद तेज झटके महसूस किए गए। रिक्टर स्केल पर इस भूकंप की तीव्रता 7.8 मापी गई है। इस शक्तिशाली भूकंप के बाद फिलीपींस समेत दुनिया के कई पड़ोसी देशों में सुनामी का हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है। आपदा की इस घड़ी में दक्षिणी फिलीपींस में भारी तबाही की खबरें आ रही हैं, जहां कई इमारतें जमींदोज हो गई हैं और कम से कम एक व्यक्ति की मौत की पुष्टि हो चुकी है।

स्थानीय पुलिस और आपदा प्रबंधन अधिकारियों के अनुसार, भूकंप के कारण मलबे में दबने से एक व्यक्ति की जान चली गई है और चार अन्य गंभीर रूप से घायल हुए हैं। प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्य युद्ध स्तर पर जारी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि भूकंप से बड़े पैमाने पर इमारतें प्रभावित हुई हैं, लेकिन फिलहाल पूरा ध्यान लोगों को बचाने पर केंद्रित होने के कारण नुकसान का सटीक आंकड़ा आना अभी बाकी है।

जानकारी के मुताबिक, समुद्र में आए इस भूकंप का केंद्र मिंडानाओ के सारंगानी प्रांत से लगभग 24 किलोमीटर पश्चिम में और जमीन से 35 किलोमीटर की गहराई पर था। भूकंप के झटके इतने खतरनाक थे कि जनरल सैंटोस शहर में स्थित एक बड़ा शॉपिंग सेंटर ताश के पत्तों की तरह ढह गया और मलबे के ढेर में बदल गया। 

इसके अलावा, एक स्थानीय स्कूल परिसर की इमारत गिरने का वीडियो भी सामने आया है। मिंडानाओ की राजधानी दावो शहर में आपदा अधिकारी लगातार स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए हैं।इस भीषण भूकंप के बाद प्रशांत सुनामी चेतावनी केंद्र ने आपातकालीन नोटिस जारी किया है। इसके तहत फिलीपींस, इंडोनेशिया, पलाऊ, ताइवान और पापुआ न्यू गिनी के तटीय क्षेत्रों में खतरनाक सुनामी लहरें उठने की आशंका जताई गई है। दूसरी ओर, जापानी अधिकारियों ने भी अपने प्रशांत तटीय इलाकों के लिए सुनामी एडवाइजरी जारी कर दी है, जहां एक मीटर तक ऊंची लहरें उठने का अनुमान लगाया गया है। तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों को तुरंत सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई है।

भारत, नेपाल, चीन और भूटान तक हिली धरती

रविवार रात को भारत और उसके पड़ोसी देशों में भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। रिक्टर स्केल पर इस भूकंप की तीव्रता 5.3 मापी गई है। इस भूकंप का मुख्य केंद्र भूटान में था, लेकिन इसका व्यापक असर भारत, नेपाल और चीन के कई हिस्सों में भी देखने को मिला। भूकंप के इन झटकों के कारण उत्तरपूर्वी भारत के कई राज्यों में लोग डर के मारे अपने घरों से बाहर निकल आए। भारत में मुख्य रूप से असम और पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों में इसका गहरा असर देखा गया। इसके अलावा, सिक्किम और बांग्लादेश के सीमावर्ती इलाकों में भी धरती कांपने से लोगों के बीच अफरा-तफरी का माहौल बन गया। गनीमत यह रही कि अभी तक इस भूकंप से किसी बड़े जान-माल के नुकसान की खबर सामने नहीं आई है।(एजेंसी)

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भ्रष्टाचार पर जिनपिंग सरकार सख्त, पूर्व रक्षा मंत्री समेत दो नेताओं को फांसी की सजा

Posted on :08-May-2026
भ्रष्टाचार पर जिनपिंग सरकार सख्त, पूर्व रक्षा मंत्री समेत दो नेताओं को फांसी की सजा

बीजिंग : चीन ने अपने सैन्य तंत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ अब तक की सबसे कठोर कार्रवाई करते हुए दो पूर्व रक्षा मंत्रियों, वेई फेंगहे और ली शांगफू को सस्पेंडेड डेथ सेंटेंस (स्थगित मृत्युदंड) की सजा सुनाई है। सैन्य अदालत द्वारा सुनाया गया यह फैसला न केवल चीन के भीतर बल्कि वैश्विक स्तर पर भी एक बड़ा संदेश माना जा रहा है।

इन दोनों शीर्ष अधिकारियों को भ्रष्टाचार का दोषी पाते हुए मौत की सजा दी गई है, हालांकि कानून के प्रावधानों के तहत उन्हें दो साल की मोहलत दी जाएगी। यदि इस अवधि के दौरान उनका आचरण संतोषजनक रहता है और कोई नया गंभीर अपराध सामने नहीं आता, तो इस सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया जाएगा, जिसमें पैरोल की कोई गुंजाइश नहीं होगी।

अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया है कि वेई फेंगहे को भारी रिश्वत लेने का दोषी पाया गया है, जबकि ली शांगफू पर रिश्वत लेने और देने, दोनों ही संगीन आरोप साबित हुए हैं। सजा के साथ ही इन दोनों पूर्व मंत्रियों के राजनीतिक अधिकार जीवनभर के लिए समाप्त कर दिए गए हैं और उनकी समस्त निजी संपत्ति को जब्त करने का आदेश दिया गया है।

वेई फेंगहे 2018 से 2023 तक इस महत्वपूर्ण पद पर रहे, वहीं ली शांगफू का कार्यकाल बेहद संक्षिप्त रहा और वे मार्च से अक्टूबर 2023 तक ही अपनी सेवाएं दे पाए। इन दोनों ही अधिकारियों को जून 2024 में कम्युनिस्ट पार्टी से निष्कासित कर उनके सैन्य पद और रैंक पहले ही छीन लिए गए थे। यह कार्रवाई राष्ट्रपति शी जिनपिंग द्वारा 2012 से चलाई जा रही भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम का हिस्सा है। सैन्य कूटनीति और रक्षा उपकरणों की खरीद में अनियमितताओं के इन आरोपों ने पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के राजनीतिक वातावरण को गंभीर रूप से प्रभावित किया था।

आधिकारिक बयानों में कहा गया कि इन अधिकारियों ने पार्टी के विश्वास को तोड़ा और सैन्य अनुशासन को दूषित किया। चीन में रक्षा मंत्री का पद मुख्य रूप से कूटनीतिक होता है, जबकि वास्तविक सैन्य शक्ति सेंट्रल मिलिट्री कमीशन के पास होती है, जिसकी कमान स्वयं राष्ट्रपति के हाथों में है। इस फैसले से यह स्पष्ट हो गया है कि चीन अपने सैन्य ढांचे में किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता या अनुशासनहीनता को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है, चाहे दोषी कितने ही ऊंचे पद पर क्यों न बैठा हो।(एजेंसी)

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अंटार्कटिका में रहस्यमयी शहर का दावा, सबमरीन हुई अचानक गायब

Posted on :16-Apr-2026
अंटार्कटिका में रहस्यमयी शहर का दावा, सबमरीन हुई अचानक गायब

स्टॉकहोम : अंटार्कटिका की सैकड़ों फीट मोटी बर्फ की परतों के नीचे क्या छिपा है? क्या वहां कोई प्राचीन राज दफन है या प्रकृति ने कोई खौफनाक मंजर छिपा रखा है? स्वीडन की गोथेनबर्ग यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने हाल ही में इन सवालों के जवाब खोजने के लिए एक साहसिक मिशन शुरू किया था, लेकिन इसके परिणाम ने विज्ञान जगत को हैरत में डाल दिया है। स्वीडिश सबमरीन ‘रन’ ने बर्फ की गहराई में डूबने से ठीक पहले कुछ ऐसी रहस्यमयी आकृतियां और चमकती चीजें रिकॉर्ड की हैं, जो आज तक किसी इंसान या सैटेलाइट ने नहीं देखी थीं। इसके बाद वो सबमरीन लापता हो गई।

प्रोफेसर अन्ना वाह्लिन के नेतृत्व में ‘रन’ नाम की एक ऑटोनॉमस सबमरीन को अंटार्कटिका के डॉटसन आइस शेल्फ के नीचे भेजा गया था। सोनार तकनीक का उपयोग करते हुए इस सबमरीन ने जो डेटा भेजा, वह चौंकाने वाला था। बर्फ के नीचे बिल्कुल सपाट पठार और सीढ़ियों जैसी बनावट दिखाई दी, जो पहली नजर में किसी प्राचीन शहर के खंडहरों का आभास कराती हैं। इसके अलावा वहां करीब 1000 फीट लंबे और 165 फीट गहरे ‘आंसू’ के आकार के विशालकाय गड्ढे मिले। 

वैज्ञानिकों का मानना है कि ये आकृतियां पानी की तेज धाराओं ने तराशी हैं, लेकिन उनकी अजीबोगरीब चमक ने कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं। यह वैज्ञानिक मिशन तब एक रहस्यमयी घटना में बदल गया जब डेटा भेजते-भेजते ‘रन’ अचानक अंटार्कटिका की अंधेरी गहराइयों में कहीं खो गई। चूंकि बर्फ के नीचे जीपीएस या रेडियो तरंगें काम नहीं करतीं, इसलिए सबमरीन को एक पूर्व-निर्धारित बिंदु पर वापस आना था, लेकिन वह कभी नहीं लौटी। टीम को आशंका है कि सबमरीन या तो किसी विशाल बर्फ की चट्टान से टकरा गई या किसी तकनीकी खराबी के कारण समंदर में समा गई। उसके आखिरी पलों का पूरा दृश्य अब एक अनसुलझा रहस्य बन चुका है।

साइंस एडवांस जर्नल में प्रकाशित यह शोध दुनिया के लिए एक बड़ी चेतावनी भी है। ‘रन’ द्वारा भेजे गए डेटा से पता चला है कि अंटार्कटिका की बर्फ ऊपर की तुलना में नीचे से कहीं ज्यादा तेजी से पिघल रही है। गर्म समुद्री लहरें बर्फ को अंदर ही अंदर खोखला कर रही हैं। यदि ये आइस शेल्फ टूटते हैं, तो वैश्विक समुद्र स्तर में तेजी से वृद्धि होगी, जिससे दुनिया भर के तटीय शहरों पर डूबने का खतरा मंडराने लगेगा। भले ही सबमरीन खो गई हो, लेकिन उसके द्वारा भेजे गए अंतिम संकेत अंटार्कटिका के उस हिस्से की हकीकत बयां कर रहे हैं, जो अब भी किसी दूसरे ग्रह की तरह अनसुना और अनसुलझा है।(एजेंसी)

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होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ा तनाव: अमेरिका ने ईरान की घेराबंदी, 15+ युद्धपोत तैनात

Posted on :14-Apr-2026
होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ा तनाव: अमेरिका ने ईरान की घेराबंदी, 15+ युद्धपोत तैनात

वॉशिंगटन : सामरिक रूप से महत्वपूर्ण फारस की खाड़ी में स्थित स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है। ईरान द्वारा इस समुद्री रास्ते पर नियंत्रण की कोशिशों के जवाब में अब अमेरिका ने भी वहां कड़ा पहरा लगा दिया है। ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ने इस क्षेत्र में अपने 15 से ज्यादा शक्तिशाली युद्धपोत तैनात कर दिए हैं, जो ईरानी बंदरगाहों और तटीय इलाकों के आसपास पूर्ण नाकेबंदी लागू कर रहे हैं। इस सैन्य कार्रवाई के बाद खाड़ी क्षेत्र में युद्ध जैसे हालात पैदा हो गए हैं।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने पुष्टि की है कि यह नाकेबंदी बेहद सख्ती के साथ लागू की जा रही है। इस ऑपरेशन का मुख्य आकर्षण अमेरिका का अत्याधुनिक युद्धपोत यूएसएस ट्रिपोली है। इस जहाज को विशेष रूप से फाइटर जेट्स के संचालन के लिए डिजाइन किया गया है, जो एक समय में 20 से अधिक एफ-35बी लाइटनिंग 2 स्टील्थ फाइटर जेट ऑपरेट करने की क्षमता रखता है। इसके अलावा, एमवी-22 ओस्प्रे विमान और हेलिकॉप्टरों के जरिए भी होर्मुज जलमार्ग की निरंतर निगरानी की जा रही है।

बयान के अनुसार, नाकेबंदी का उद्देश्य उन सभी जहाजों को रोकना है जो ईरान के बंदरगाहों में प्रवेश कर रहे हैं या वहां से बाहर जा रहे हैं। हालांकि, अमेरिका ने यह साफ किया है कि यह कार्रवाई केवल ईरान केंद्रित है। जो जहाज अन्य देशों के बंदरगाहों के लिए इस रास्ते का उपयोग कर रहे हैं, उन्हें सुरक्षित मार्ग दिया जाएगा। इसी बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि ईरान का कोई भी फास्ट अटैकर जहाज नाकेबंदी के करीब आता है, तो उसे तुरंत नष्ट कर दिया जाएगा।

दरअसल, यह तनाव तब शुरू हुआ जब पिछले शनिवार को पाकिस्तान में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच हुई शांति वार्ता बेनतीजा रही। 28 फरवरी को हुए सशर्त युद्ध-विराम को स्थायी समझौते में बदलने की कोशिशें नाकाम होने के बाद अमेरिका ने सैन्य दबाव बढ़ाने का फैसला किया। अमेरिका के इस एक्शन पर ईरान ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। ईरानी सेना ने धमकी दी है कि यदि उनके बंदरगाहों को रोका गया, तो फारस और ओमान की खाड़ी का कोई भी बंदरगाह सुरक्षित नहीं रहेगा। ईरान का कहना है कि सुरक्षा या तो सबके लिए होगी या किसी के लिए भी नहीं। फिलहाल, अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या कूटनीति के जरिए इस सैन्य टकराव को टाला जा सकेगा या क्षेत्र एक बड़े संघर्ष की ओर बढ़ेगा।(एजेंसी)

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डेडलाइन से पहले अमेरिका-इजराइल का ईरान पर बड़ा हमला, बढ़ा वैश्विक तनाव

Posted on :08-Apr-2026
डेडलाइन से पहले अमेरिका-इजराइल का ईरान पर बड़ा हमला, बढ़ा वैश्विक तनाव

सबसे बड़ा हमला खर्ग आइलैंड पर

-रिहायशी इलाकों और कोम-कशान में भी पुलों को निशाना बनाया

तेहरान : अमेरिका और इजराइल ने मंगलवार को ईरान में कई जगहों पर ताबड़तोड़ हमले किए हैं। सबसे बड़ा हमला खर्ग आइलैंड पर हुआ, जहां ऑयल टर्मिनल को टारगेट किया गया। ईरान का करीब 80 से 90 प्रतिशत कच्चा तेल इसी खर्ग आइलैंड एक्सपोर्ट होता है। इस तरह अमेरिका और इजराइल ने ईरान की आर्थिक कमर तोड़ने की कोशिश की है। इन हमलों पर ईरान ने कहा है कि वो इसका माकूल जवाब देगा।

इसके अलावा अमेरिका और इजराइल ने ईरान के रिहाशी इलाकों और कोम-कशान में भी पुलों को निशाना बनाया गया। काशान के पास यहयाबाद रेलवे पुल पर हमले में 2 लोगों की मौत हो गई और 3 लोग घायल हुए हैं। इसके अलावा उत्तर-पश्चिम ईरान में तबरीज-जंजान हाईवे के पुल पर भी हमला हुआ है।

इसके पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने चेतावनी दी थी कि अगर ईरान ने मंगलवार को रात 8 बजे (अमेरिका समयानुसार) तक होर्मुज स्ट्रेट नहीं खोला, तब उसके जरूरी ठिकानों पर हमला होगा। इन हमलों के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई कर यूएई के शारजाह में हमला किया। ईरान पहले ही कह चुका था कि अब वह चुप नहीं बैठेगा। अमेरिका और उसके सहयोगियों के ठिकानों को निशाना बनाएगा। ईरान ने जवाबी कार्रवाई करने की चेतावनी दी है।

मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया हैं कि तेहरान, कोम और लोरेस्तान प्रांत के खोर्रमबाद हवाई अड्डे सहित कई अन्य स्थानों पर धमाकों ज़िक्र है। साथ ही इससे पहले हमदान के एक रिहायशी इलाके पर हुए हमलों की भी जानकारी दी गई है। कोम प्रांत के राजनीतिक-सुरक्षा मामलों के उप गवर्नर ने कहा कि प्रांत के पश्चिमी हिस्से में क़ोम शहर के बाहर को जोड़ने वाले पुलों में से एक को अमेरिका और इजरायल के हमले में निशाना बनाया गया।

इसके अलावा इजरायल अमेरिका ने ईरान के लिए रणनीतिक रूप से अहम खार्ग आईलैंड पर भी फिर से हमला किया है। हमले के बाद यहां से धुएं का गुबार निकलते दिखाई दिया। ईरानी सरकारी मीडिया ने बताया कि उत्तरी ईरान के अल्बोर्ज़ प्रांत में एक हवाई हमले में कम से कम 18 लोग मारे गए। इसने पूर्वी और पश्चिमी तेहरान के रिहायशी इलाकों के साथ ही मेहराबाद हवाई अड्डे और एक बिजली संयंत्र पर भी हमलों की रिपोर्ट दी। एक यहूदी प्रार्थनास्थल सिनेगॉग को भी नुकसान हुआ है। लेकिन इसकी पुष्टि नहीं की जा सकी।

इसके अलावा ईरान इंटरनेशनल ने तेहरान के दक्षिण-पूर्व में स्थित पारचिन कॉम्प्लेक्स में एक बड़े धमाके की रिपोर्ट दी, यह एक संवेदनशील डिफेंस इंडस्ट्रियल साइट है जो मिसाइल उत्पादन और सैन्य निर्माण से जुड़ा है। आईडीएफ ने कहा है कि हाल के सटीक हमलों में 130 से अधिक ईरानी हवाई रक्षा प्रणालियां नष्ट कर दी गई हैं। तनाव में यह ताज़ा बढ़ोतरी इस समय में हुई है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा ईरान के लिए होर्मुज़ स्ट्रेट को फिर से खोलने की तय समय सीमा नज़दीक आ रही है।

वाशिंगटन ने चेतावनी दी है कि यदि तेहरान इसका पालन करने में विफल रहता है, तब वह ऊर्जा बुनियादी ढांचे और पुलों को निशाना बना सकता है। इस बीच ईरान ने अपने दक्षिणी पड़ोसियों से अमेरिका को अपने हवाई क्षेत्र और जमीन के इस्तेमाल की अनुमति न देने का आग्रह किया है। पिछले कई हफ्तों से चल रहे यूएस-इजरायल बनाम ईरान युद्ध का यह नया और सबसे खतरनाक चरण है। ट्रंप ने साफ चेतावनी दी थी कि अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज नहीं खोला गया तो ईरान के पुल और पावर प्लांट को ध्वस्त कर दिया जाएगा।(एजेंसी)

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फिर लौटा कोरोना का खतरा! नया वेरिएंट ‘Cicada’ तेजी से फैला, बढ़ी चिंता

Posted on :31-Mar-2026
फिर लौटा कोरोना का खतरा! नया वेरिएंट ‘Cicada’ तेजी से फैला, बढ़ी चिंता

New Variants Coronavirus : कोरोना वायरस के नए वेरिएंट ने दस्तक दी है और तेजी से फैल रहा है। अमेरिका में कोविड-19 का नया सबवेरिएंट BA.3.2 सामने आया है, जिसे सिकाडा (Cicada) भी कहा जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, सबवेरिएंट BA.3.2 पहली बार नवंबर 2024 में दक्षिण अफ्रीका में डिटेक्ट किया गया। मार्च 2026 तक यह अमेरिका के 25 राज्यों में सैंपल्स में पाया गया है। साथ ही यूरोप (जैसे- जर्मनी, डेनमार्क, नीदरलैंड्स) में 30% तक पहुंच चुका है। WHO ने इसे वेरिएंट अंडर मॉनिटरिंग (VUM) में रखा है। चलिए हम आपको कोविड-19 के नए सबवेरिएंट BA.3.2 के बारे में विस्तार से बताते हैं।

BA.3.2 सिकाडा वेरिएंट क्या है?

- यह वेरिएंट दक्षिण अफ्रीका में दिसंबर 2024 के अंत में पहली बार पहचाना गया था और 2025 में यह ज्यादा फैला।
- अब यह 20 से ज्यादा देशों में देखा जा चुका है।
- यह ओमिक्रॉन वेरिएंट का वंशज है, जो दिसंबर 2021 में सामने आया था।
- इसमें स्पाइक प्रोटीन में लगभग 70-75 म्यूटेशन बताए गए हैं।
- विशेषज्ञों के अनुसार, इस वेरिएंट से अभी कोई ज्यादा खतरा नहीं है। यह 2025-2026 के सर्दियों में फैले अन्य वेरिएंट्स की तुलना में ज्यादा गंभीर बीमारी नहीं पैदा कर रहा है।
- हालांकि, कई म्यूटेशन के कारण मौजूदा कोविड वैक्सीन इस पर कम असरदार हो सकती है।

सिकाडा वेरिएंट के लक्षण

इस वेरिएंट के लक्षण पहले वाले ओमिक्रॉन स्ट्रेन के काफी मिलते-जुलते हैं। अभी तक कोई नया या असामान्य लक्षण नहीं देखा गया है। मुख्य लक्षण इस प्रकार हैं:

- गला खराब होना
- सूखी खांसी
- थकान और शरीर में दर्द
- बुखार और ठंड लगना
- सिरदर्द

बचाव के तरीके

कोविड से बचने और इसे फैलने से रोकने के लिए CDC की ओर से बताए गए सामान्य उपाय अपनाएं:

1. खाना खाने से पहले या बीमार व्यक्ति के संपर्क में आने के बाद हाथ अच्छे से धोएं।
2. अगर ऊपर बताए लक्षण दिखें तो घर पर रहें, आराम करें और दूसरों से दूर रहें ताकि वायरस न फैले।
3. अगर लक्षण बने रहें या बढ़ें तो डॉक्टर से संपर्क करें और उनकी सलाह लें।

इस तरह कह सकते हैं कि BA.3.2 सिकाडा वेरिएंट कोविड का एक हेवी म्यूटेटेड ओमिक्रॉन सबवैरिएंट है, जो इम्यूनिटी को बेहतर तरीके से प्रभावित कर सकता है। हालांकि, अभी तक कोई सबूत नहीं है कि यह पिछले वेरिएंट्स से ज्यादा गंभीर बीमारी या मौत का कारण बनता है। वैक्सीन अभी भी गंभीर संक्रमण से बचाव करती है, लेकिन अपडेटेड बूस्टर लेना फायदेमंद हो सकता है। कोविड के नए वेरिएंट्स के आने का सिलसिला रुकने वाला नहीं है, इसलिए सतर्कता हमेशा जरूरी है।(एजेंसी)

 

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मिडल ईस्ट में अमेरिका की बड़ी तैयारी: 2000 ‘खतरनाक’ सैनिकों की तैनाती का प्लान

Posted on :25-Mar-2026
मिडल ईस्ट में अमेरिका की बड़ी तैयारी: 2000 ‘खतरनाक’ सैनिकों की तैनाती का प्लान

Explainer : डोनाल्ड ट्रंप और अमेरिका आखिर ईरान से चल रही जंग में क्या चाहते हैं? ऐसा सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि पेंटागन यानी अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने 2000 सैनिकों को मिडल ईस्ट भेजने का आदेश दिया है। ये जवान पैराट्रूपर्स होंगे, जिन्हें आमतौर पर बड़ी जंगों में ही उतारा जाता है। पैराशूट से उतरने वाले यानी किसी अहम जंग में अचानक हिस्सा लेने के लिए भेजे जाने वाले जवानों को पैराट्रूपर्स कहा जाता है। ये सैनिक अमेरिका की 82वीं एयरबोर्न डिविजन से जुड़े होंगे। अब तक यह स्पष्ट नहीं है कि मिडल ईस्ट में इन सैनिकों को कहां उतारा जाएगा।

इससे चर्चा तेज हो गई है कि ईरान को बातचीत का प्रस्ताव देने के बाद भी डोनाल्ड ट्रंप कई विकल्पों पर काम कर रहे हैं। अमेरिका की जिस 82वीं एयरबोर्न डिविजन के सैनिकों को मिडल ईस्ट भेजा जाएगा, वह कॉम्बेट फोर्स कही जाती है। इस फोर्स की खासियत यह है कि महज 18 घंटे के अंदर यह दुनिया के किसी भी कोने में तैनात की जा सकती है। इस ब्रिगेड का नेतृत्व मेजर जनरल ब्रांड टेग्टमियर करते हैं। इसमें कुल दो बटालियन हैं और एक में 800 सैनिक शामिल हैं। अब तक यह जानकारी नहीं है कि आखिर इन सैनिकों को मिडल ईस्ट में क्यों भेजा रहा है। फिर भी ये चर्चाएं तेज हैं कि आखिर डोनाल्ड ट्रंप का क्या प्लान है।

न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार आने वाले कुछ दिनों में और भी सैनिक भेजे जा सकते हैं। एक तरफ डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को शांति का प्रस्ताव भेजा है तो दूसरी तरफ सैनिकों की तैनाती की बात है। पहले ही अमेरिका का एक नौसैनिक जहाज USS त्रिपोली रवाना हो चुका है। इसमें करीब 2000 अमेरिकी नौसैनिक सवार हैं। अब तक यह क्लियर नहीं है कि पैराट्रूपर्स को कहां तैनात किया जाएगा, लेकिन कहा जा रहा है कि इन्हें ऐसे स्थान पर रखा जाएगा, जहां से ईरान पहुंचना आसान रहे। ज्यादा वक्त ना लगे। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में कहा गया है कि इन सैनिकों को ईरान में जमीनी हमले के लिए रवाना किया जा सकता है।

ईरान के ऑइल हब पर भी है टारगेट अटैक की तैयारी?

विशेष तौर पर ईरान के खार्ग द्वीप को टारगेट किया जा सकता है, जिसे उसका ऑइल हब कहा जाता है। इसके अलावा ईरान के यूरेनियम भंडार को भी इनके जरिए टारगेट किया जा सकता है। गौरतलब है कि इस जंग के 26 दिन बीत चुके हैं और अब तक ईरान ने युद्ध विराम के संकेत नहीं दिए हैं। यहां तक कि अमेरिका के प्रस्ताव की भी खिल्ली उड़ाने की कोशिश की है। ईरान के लीडर मोजतबा खामेनेई का कहना है कि अमेरिका को अपनी हार को अग्रीमेंट का नाम नहीं देना चाहिए। इस युद्धविराम की कोशिश में पाकिस्तान की ओर से मध्यस्थता करने का प्रस्ताव भी रखा गया है।(एजेंसी)

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जंग के बीच पीएम मोदी की ईरान के राष्ट्रपति से बातचीत, कहा- कूटनीति से निकले समाधान

Posted on :13-Mar-2026
जंग के बीच पीएम मोदी की ईरान के राष्ट्रपति से बातचीत, कहा- कूटनीति से निकले समाधान

नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बीती रात ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन के साथ टेलीफोन पर बातचीत की और पश्चिम एशिया की मौजूदा गंभीर स्थिति पर अपनी चिंता साझा की। दोनों नेताओं के बीच यह संवाद क्षेत्र में लगातार बढ़ते तनाव और आम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर हुई है। प्रधानमंत्री मोदी ने क्षेत्र में नागरिकों की जान जाने और असैन्य बुनियादी ढांचे को हो रहे नुकसान पर गहरा दुख व्यक्त किया।

प्रधानमंत्री ने ईरानी राष्ट्रपति के सामने स्पष्ट किया कि वर्तमान परिस्थितियों में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और ऊर्जा सुरक्षा भारत के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने सामान और ईंधन के निर्बाध परिवहन की आवश्यकता पर जोर दिया, क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य में हालिया घटनाक्रमों ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित किया है। गौरतलब है कि ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद किए जाने और हाल ही में भारत आ रहे एक तेल टैंकर पर हुई गोलीबारी ने व्यापारिक सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी देते हुए कहा, क्षेत्र में गंभीर स्थिति पर चर्चा के लिए मैंने ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेजेश्कियन से बातचीत की। मैंने तनाव बढ़ने और बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने संकट के समाधान के लिए शांति और स्थिरता के प्रति भारत की प्रतिबद्धता दोहराई और दोनों पक्षों से संवाद व कूटनीति का रास्ता अपनाने का आग्रह किया।आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने प्रधानमंत्री को ईरान की मौजूदा स्थिति और क्षेत्रीय घटनाक्रम पर अपने दृष्टिकोण से अवगत कराया। दोनों नेता भविष्य में भी निरंतर संपर्क बनाए रखने पर सहमत हुए हैं।

यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के खिलाफ किए गए हमलों में सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मृत्यु के बाद स्थिति अत्यंत विस्फोटक हो गई है। पिछले 10 दिनों में प्रधानमंत्री मोदी ने ओमान, कुवैत, सऊदी अरब, यूएई, इज़राइल और कतर सहित कई देशों के नेताओं से चर्चा की है। इन वार्ताओं का मुख्य केंद्र पश्चिम एशिया में रहने वाले लगभग एक करोड़ भारतीयों की सुरक्षा है। अकेले ईरान में 10,000 और इज़राइल में 40,000 से अधिक भारतीय नागरिक निवास कर रहे हैं। भारत ने स्पष्ट किया है कि वह किसी भी देश की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के उल्लंघन के खिलाफ है और जल्द से जल्द शांति बहाली चाहता है।(एजेंसी)

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प्लास्टिक को कहो अलविदा! जापान में आलू के स्टार्च से बने इको-फ्रेंडली बैग लॉन्च

Posted on :07-Feb-2026
प्लास्टिक को कहो अलविदा! जापान में आलू के स्टार्च से बने इको-फ्रेंडली बैग लॉन्च

टोक्यो : प्लास्टिक बैग की समस्या से निपटने जापान ने बेहद उपयोगी समाधान पेश किया है। जापान में ऐसे किराने के बैग लॉन्च किए गए हैं, जो पूरी तरह आलू के स्टार्च से बनाए गए हैं। दिखने और उपयोग में बिल्कुल प्लास्टिक जैसे मजबूत इन बैगों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि ये पारंपरिक प्लास्टिक की तरह वर्षों तक कचरे के ढेर में पड़े नहीं रहते, बल्कि पानी के संपर्क में आते ही सहज रूप से घुल जाते हैं। सदियों तक समुद्र में तैरते रहने वाले प्लास्टिक बैग अक्सर कछुओं, मछलियों और अन्य समुद्री जीवों के लिए घातक साबित होते हैं, क्योंकि वे इन्हें भोजन समझकर निगल लेते हैं। जापान में विकसित यह नई सामग्री इस समस्या का समाधान प्रस्तुत करती है।

खास बात यह है कि यह स्टार्च-आधारित बैग ठंडे पानी में भी पूरी तरह टूट जाता है। यदि कोई समुद्री जीव इन्हें गलती से निगल ले, तो यह उसके शरीर में बिना किसी नुकसान के प्राकृतिक रूप से घुल जाएगा। बैग के घुलने के बाद पानी में न तो कोई जहरीला रसायन बचता है और न ही माइक्रोप्लास्टिक। यह नवाचार दिखाता है कि किस तरह तकनीक और प्रकृति के बीच संतुलन बनाकर पर्यावरण–अनुकूल समाधान विकसित किए जा सकते हैं।

आलू के स्टार्च से बना यह बैग न सिर्फ मजबूत है और वजन उठाने में सक्षम है, बल्कि उपयोग के बाद इसे नष्ट करना भी बेहद आसान है। इससे प्लास्टिक कचरे का बोझ कम हो सकता है और समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र को भी बड़ा लाभ मिलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि जापान का यह कदम अन्य देशों के लिए भी प्रेरणा बन सकता है। यह मॉडल दर्शाता है कि यदि रोजमर्रा की वस्तुओं के उत्पादन में पर्यावरण–सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाए, तो धरती को प्लास्टिक मुक्त बनाने की दिशा में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है।(एजेंसी)

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कोलंबिया में भीषण विमान हादसा: सांसद समेत 15 लोगों की मौत, पहाड़ी क्षेत्र में बिखरा मलबा

Posted on :29-Jan-2026
कोलंबिया में भीषण विमान हादसा: सांसद समेत 15 लोगों की मौत, पहाड़ी क्षेत्र में बिखरा मलबा

कोलंबिया : दक्षिण अमेरिकी देश कोलंबिया से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है, जहां बुधवार, को एक विमान दुर्घटना में एक सांसद और चुनावी उम्मीदवार सहित कुल 15 लोगों की जान चली गई। विमानन अधिकारियों द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, यह हादसा वेनेजुएला सीमा के पास उत्तर संतांदर के दुर्गम पहाड़ी इलाके में हुआ। दुर्घटनाग्रस्त विमान कोलंबिया की सरकारी एयरलाइन सटेना का था। ट्विन इंजन वाले इस प्रोपेलर विमान ने कुकुटा शहर से ओकाणा के लिए उड़ान भरी थी। उड़ान भरने के मात्र 12 मिनट बाद ही विमान का संपर्क एयर ट्रैफिक कंट्रोल (एटीएस) से टूट गया, जिससे हड़कंप मच गया।

घंटों चले गहन खोजी अभियान के बाद, वायुसेना को प्लाया डी बेलन के ग्रामीण और पहाड़ी क्षेत्र में विमान का मलबा मिला। राहत और बचाव दल जब तक वहां पहुंचे, तब तक विमान में सवार सभी 15 यात्रियों की मृत्यु हो चुकी थी। इस हादसे में जान गंवाने वालों में 36 वर्षीय डायोजनीज क्विंटरो भी शामिल हैं, जो कोलंबिया की संसद के सक्रिय सदस्य थे। क्विंटरो कटाटुम्बो क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते थे, जो लंबे समय से संघर्ष और कोका की खेती के लिए चर्चा में रहता है।

वह 2022 में उन 16 विशेष प्रतिनिधियों में से एक चुने गए थे, जिन्हें देश के दशकों पुराने आंतरिक संघर्ष के पीड़ितों के लिए आरक्षित सीटों पर जगह मिली थी। उनके साथ ही आगामी चुनाव के उम्मीदवार कार्लोस साल्सेडो की भी इस दुखद घटना में मृत्यु हो गई। जिस स्थान पर यह विमान क्रैश हुआ, वह एंडीज पर्वतमाला का एक बेहद ऊबड़-खाबड़ और चुनौतीपूर्ण इलाका है। यह क्षेत्र कोलंबिया के सबसे बड़े गुरिल्ला समूह, नेशनल लिबरेशन आर्मी के प्रभाव वाला माना जाता है।

प्रारंभिक अनुमानों के अनुसार, क्षेत्र का कठिन भूगोल और अचानक बदलने वाला मौसम इस हादसे की वजह हो सकता है। कोलंबिया के राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो ने इस त्रासदी पर गहरा शोक व्यक्त किया है और पीड़ितों के परिवारों के प्रति संवेदनाएं प्रकट की हैं। फिलहाल विमानन एजेंसियां इस बात की विस्तृत जांच कर रही हैं कि हादसे का असली कारण तकनीकी खराबी थी या खराब मौसम। गौरतलब है कि इससे एक दिन पूर्व ही भारत में भी एक बड़ा विमान हादसा हुआ था, जिसमें महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजीत पवार की बारामती में चार्टर प्लेन क्रैश होने से मृत्यु हो गई थी।(एजेंसी)

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भारत-अमेरिका रिश्तों पर ट्रंप का भरोसा: पीएम मोदी को बताया शानदार दोस्त, ट्रेड डील जल्द

Posted on :22-Jan-2026
भारत-अमेरिका रिश्तों पर ट्रंप का भरोसा: पीएम मोदी को बताया शानदार दोस्त, ट्रेड डील जल्द

दावोस : स्विट्जरलैंड के बर्फीले पहाड़ों के बीच आयोजित हो रहे वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के 56वें वार्षिक शिखर सम्मेलन से एक बड़ी खबर सामने आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जमकर प्रशंसा की है और दोनों देशों के बीच एक महत्वपूर्ण व्यापारिक समझौते (ट्रेड डील) के जल्द संपन्न होने की उम्मीद जताई है। शिखर सम्मेलन के दौरान हुई एक विशेष चर्चा में ट्रंप ने पीएम मोदी को अपना एक बेहद शानदार दोस्त बताया और कहा कि वह भारत के साथ संबंधों को लेकर बहुत उत्साहित हैं।

ट्रंप ने अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी के प्रति गहरा सम्मान व्यक्त करते हुए कहा, पीएम मोदी एक अद्भुत इंसान और मेरे बहुत अच्छे मित्र हैं। हम उनके नेतृत्व का सम्मान करते हैं और बहुत जल्द भारत के साथ अमेरिका की एक बड़ी और प्रभावी ट्रेड डील होने जा रही है। राष्ट्रपति ट्रंप के इस बयान को वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती साख और मजबूत होते द्विपक्षीय संबंधों के रूप में देखा जा रहा है। ट्रंप का यह सकारात्मक रुख उस समय आया है जब दोनों देशों के बीच व्यापारिक वार्ता एक निर्णायक मोड़ पर खड़ी है। हालांकि, इस बहुप्रतीक्षित डील की राह में कुछ चुनौतियां भी बनी हुई हैं।

बीते कुछ समय से दोनों देशों के वार्ताकार टैरिफ (शुल्क) की दरों और एक-दूसरे के बाजारों तक पहुंच बनाने जैसे तकनीकी मुद्दों पर आम सहमति बनाने की कोशिश कर रहे हैं। विशेष रूप से ऊर्जा और कृषि क्षेत्र से जुड़े कुछ मसलों पर दोनों देशों के बीच असहमति के स्वर भी उठते रहे हैं। लेकिन ट्रंप के ताजा बयान ने यह संकेत दे दिया है कि राजनीतिक स्तर पर इस डील को लेकर काफी इच्छाशक्ति है। वहीं, भारत के विदेश मंत्रालय ने भी इस दिशा में सकारात्मक संकेत दिए हैं।

मंत्रालय के अनुसार, भारत और अमेरिका पिछले एक साल से अधिक समय से एक संतुलित व्यापार समझौते के लिए निरंतर संपर्क में हैं। दोनों देश एक ऐसी डील के लिए प्रतिबद्ध हैं जो दोनों अर्थव्यवस्थाओं के लिए फायदेमंद साबित हो। फरवरी 2025 से शुरू हुई इस वार्ता के अब तक कई दौर पूरे हो चुके हैं। अब दावोस में ट्रंप की इन टिप्पणियों के बाद उम्मीद बढ़ गई है कि आने वाले हफ्तों में आर्थिक और रणनीतिक मोर्चे पर कोई बड़ा ऐलान देखने को मिल सकता है।(एजेंसी)

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