सुभाष गुप्ता
सूरजपुर : प्रतापपुर राष्ट्रीय पशु बाघ की मौत ने एक बार फिर वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रतापपुर वन परिक्षेत्र अंतर्गत घूई वन परिक्षेत्र के रेवटी बीट में शिकारियों द्वारा करंट लगाकर बाघ की हत्या किए जाने के मामले से क्षेत्र में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों का आरोप है कि यह घटना वन विभाग की घोर लापरवाही, उदासीनता और गैर-जिम्मेदाराना रवैये का प्रत्यक्ष परिणाम है।

ग्रामीणों ने सूरजपुर जिला वनाधिकारी (डीएफओ) को ज्ञापन सौंपते हुए बताया कि जंगल और वन्य प्राणियों की सुरक्षा अब भगवान भरोसे छोड़ दी गई है। क्षेत्र में कई दिनों से बाघ की हलचल देखी जा रही थी, इसके बावजूद वन विभाग ने न तो गश्त बढ़ाई और न ही कोई सतर्कता बरती। परिणामस्वरूप शिकारियों ने बाघ को करंट लगाकर मौत के घाट उतार दिया।

बताया गया कि रेवटी बीट में बाघ की हत्या के चार दिन बाद शव बरामद किया गया, जो विभागीय लापरवाही को और भी उजागर करता है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि रेवटी बीट के जिम्मेदार वन अधिकारी जयनारायण मेहता और सुनील केरकेट्टा अपने बीट में नियमित रूप से उपस्थित नहीं रहते। वे कभी अंबिकापुर तो कभी अपने घर से ही आना-जाना करते हैं, और 15–20 दिन में एक बार कार्यालय आना भी बड़ी बात मानी जाती है।
ग्रामीणों का कहना है कि इसी लचर व्यवस्था के कारण पहले भी कई वन्य जीवों और पक्षियों की जान जा चुकी है। इसके बावजूद अब तक मात्र एक बीट गार्ड को निलंबित कर मामले को दबाने का प्रयास किया जा रहा है, जबकि इतने बड़े मामले में अन्य जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर भी कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए थी।
ज्ञापन सौंपने वालों में ग्राम पंचायत रेवटी के सरपंच विष्णु सिंह, पंच वार्ड क्रमांक-6 शुभम गुप्ता, पूर्व मंडल महामंत्री अवधेश गुप्ता, वार्ड क्रमांक-5 राजपाल अगरिया, नीतीश पटेल, अनिल विश्वकर्मा, सीताराम पटेल, हिमालय पटेल सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।
इस संबंध में सूरजपुर डीएफओ दुलेश्वर साहू ने कहा कि मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है और दोषी पाए जाने वाले किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा। वन्यजीव संरक्षण को लेकर उठते सवालों के बीच यह घटना वन विभाग के लिए एक बड़ी चेतावनी मानी जा रही है।
















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