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महासमुंद में ‘खुशियों के पांच दिन’ का भव्य समापन योग शक्ति आस्था दीदी ने दिए लाइफ चेंजिंग थॉट....

महासमुंद में ‘खुशियों के पांच दिन’ का भव्य समापन योग शक्ति आस्था दीदी ने दिए लाइफ चेंजिंग थॉट....

संवाददाता: प्रभात मोहंती

सकारात्मक सोच से जीवन बदलने का संदेश... 

महासमुंद : शहर में आयोजित आध्यात्मिक एवं प्रेरणादायक कार्यक्रम ‘खुशियों के पांच दिन’ का आज अंतिम दिवस बेहद उत्साह, ऊर्जा और भावनात्मक माहौल के बीच संपन्न हुआ। कार्यक्रम के आखिरी दिन योग शक्ति आस्था दीदी ने मंच से उपस्थित लोगों को जीवन बदलने वाले विचारों, सकारात्मक सोच, मन की शक्ति और ईश्वर से जुड़ाव के महत्व पर विस्तृत मार्गदर्शन दिया।
उन्होंने कहा कि इंसान का मन यदि मजबूत हो जाए तो जीवन की हर कठिनाई आसान हो जाती है। अच्छे विचार, शुद्ध सोच और सकारात्मक ऊर्जा से व्यक्ति का आभामंडल यानी ओरा (Aura) भी निखरने लगता है।

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दो बैग की कहानी से समझाया जीवन का रहस्य

आस्था दीदी ने कहा कि हर इंसान के पास दो अदृश्य बैग होते हैं—एक सफेद बैग और दूसरा काला बैग।
सफेद बैग में खुशी, उत्साह, उमंग, दया, करुणा, सहानुभूति, अच्छा स्वास्थ्य, समृद्धि, प्रेम और सफलता भरी होती है।
वहीं काला बैग अशांति, गुस्सा, चिंता, नफरत, दूसरों को दुख देना, बुरे विचार, रिश्तों में दूरी और आर्थिक परेशानियों का प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि यदि जीवन में सुख चाहिए तो काले बैग को खाली कर सफेद बैग को भरना होगा।

नकारात्मकता हटेगी तभी सकारात्मकता आएगी

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे गंदे पानी से भरे पात्र में साफ पानी नहीं डाला जा सकता, उसी तरह मन में वर्षों से भरे नकारात्मक विचारों को निकाले बिना सकारात्मकता नहीं लाई जा सकती। यदि माइंड शांत रहेगा तो मन भी शांत रहेगा और जीवन के कार्य स्वतः सरल होने लगेंगे।

हर दिन चुनना है – 1 टू व्हाइट या 1 टू ब्लैक

आस्था दीदी ने कहा कि यदि जीवन बदलना है तो रोज निर्णय लेना होगा कि आपको व्हाइट थॉट चाहिए या ब्लैक थॉट।
नकारात्मक सोच के लीकेज को बंद कर सकारात्मक विचारों से मन को भरना होगा।

करोड़ों का नुकसान हुआ, फिर भी व्यक्ति रहा शांत

उन्होंने एक प्रेरणादायक प्रसंग सुनाया जिसमें एक व्यक्ति की फैक्ट्री में आग लग गई थी और करोड़ों का नुकसान हुआ, लेकिन वह शांत स्वर में बोला – “ईश्वर का धन्यवाद, किसी कर्मचारी को कुछ नहीं हुआ।” दीदी ने कहा कि परिस्थितियां चाहे कैसी भी हों, मन की शांति नहीं खोनी चाहिए।

चित्रकला प्रतियोगिता की कहानी से दिया बड़ा संदेश

उन्होंने बताया कि एक चित्रकला प्रतियोगिता में सबसे श्रेष्ठ चित्र वह चुना गया जिसमें एक झोपड़ी, खेत, हरियाली और चारों ओर तेज तूफान का दृश्य था।

उस चित्र में किसान ऊपर देखकर कह रहा था –
"हे प्रभु, यह प्रकृति आपकी है, मेहनत आपकी देन है, मैं क्यों डरूं?"
इसका अर्थ बताते हुए उन्होंने कहा कि जीवन में चाहे कितना भी संकट आ जाए, मन में विश्वास रखना चाहिए कि भगवान साथ हैं।

बोझ मत पालो, मन हल्का रखो

आस्था दीदी ने एक बुजुर्ग महिला की कहानी सुनाई जो बैलगाड़ी में बैठने के बाद भी सिर पर पोटली रखे थी।
जब गाड़ीवान ने पूछा तो महिला बोली – “तुम मेरी सवारी का बोझ उठा रहे हो, पोटली मैं खुद उठा लूंगी।”
उन्होंने कहा कि यही हाल इंसान का है, जो वर्षों से मानसिक बोझ लेकर जी रहा है। जब तक मन का बोझ नहीं उतरेगा, जीवन में शांति नहीं मिलेगी।

हवाई प्रेयर से आत्मशुद्धि का संदेश

उन्होंने सभी को प्रतिदिन ये चार बातें बोलने की सलाह दी –

I am sorry – मैं क्षमा मांगता हूं
Please forgive me – मुझे माफ कीजिए
I love you – मैं आपसे प्रेम करता हूं
Thank you so much – धन्यवाद

वॉटर थॉट और मॉर्निंग मेडिटेशन

उन्होंने कहा कि पानी पीने से पहले सकारात्मक विचार करें –
मैं स्वस्थ हूं, मेरा परिवार स्वस्थ है, घर में खुशियां हैं, धन पर्याप्त है, प्रभु का धन्यवाद।
सुबह उठकर ॐ मंत्र जाप, ध्यान और ईश्वर को धन्यवाद देने से दिन शुभ बनता है।

अरुणिमा सिन्हा की कहानी सुनकर भावुक हुए लोग

कार्यक्रम के अंत में आस्था दीदी ने अरुणिमा सिन्हा की संघर्षपूर्ण कहानी सुनाई। ट्रेन हादसे में पैर गंवाने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और कृत्रिम पैर के सहारे माउंट एवरेस्ट फतह कर इतिहास रच दिया। उन्होंने कहा कि शारीरिक कमजोरी कभी सपनों को नहीं रोक सकती, यदि इरादे मजबूत हों।

कार्यक्रम का समापन भावुक माहौल में

‘खुशियों के पांच दिन’ के अंतिम दिवस लोगों ने आस्था दीदी के विचारों को जीवन में अपनाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम स्थल पर आध्यात्मिक ऊर्जा, सकारात्मक वातावरण और भावुकता का अनोखा संगम देखने को मिला।

महासमुंद वासियों के लिए यह आयोजन यादगार बन गया।

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