संवाददाता: सुभाष गुप्ता
फलदार वृक्षों से जब बना उपवन तो शरारती तत्व कब्जा करने लगाए है गिद्ध दृष्टी
सूरजपुर : सूरजपुर ब्यूरो -एस ई सी एल बिश्रामपुर क्षेत्र के अंतर्गत आनेवाले विस्थापित ग्राम करमपुर की बंजर भूमि पर सेवा निवृत्त कालरी कर्मचारी वृक्ष मित्र पंडित राजेंद्र दुबे ने अपनी जीवन भर की गाढ़ी कमाई बंजर भूमि को हरियाली बनाने में लगा दी ।सेवा मुक्ति के बाद हालही में सूरजपुर जिला कलेक्टर को एक पत्र लिखा जिसमें उल्लेख किया है कि एक समिति बनाकर उसके पदेन अध्यक्ष कलेक्टर रहे ताकि भविष्य में इस उपवन को बचाया जा सके। तो दूसरी तरफ कुछ शरारती नशेड़ी युवक पूरे उपवन पर कब्जा करने का साजिश रच रहे हैं जिससे वृक्ष मित्र राजेंद्र दुबे काफी विचलित एवं परेशान।।

जानकारी के अनुसार दक्षिण पूर्वी कोयला परिक्षेत्र के अंतर्गत आने वाला कॉलोनी से सत्ता विस्थापित ग्राम करमपुर से लगा एस ई सी एल कंपनी की भूमि पर अपने जीवन भर की लाखों रुपए कमाई लगाकर विभिन्न प्रजाति के फलदार वृक्ष जिसमें आम ,अमरूद, लीची , कटहल जामुन, रुद्राक्ष जैसे अनेक पौधे रोपित कर विशाल वृक्ष तैयार किया जो आज बड़ा होकर फल से लद गया है। अब इस उपवन पर ग्राम करमपुर के शरारती तत्व अपना पहुंच बता कर पंडित राजेंद्र दुबे को परेशान करने लगे हैं।

बताया जाता है कि वृक्ष मित्र पंडित राजेंद्र दुबे केवल वृक्ष ही नहीं लगाया है अपितु बहुत सुंदर पंचमुखी श्री हनुमान मंदिर का भी निर्माण कर मंदिर स्थापित किया है जिसमें आसपास के लोग पूजा करने आते हैं एवं बच्चे सुबह-शाम घूमने जाते है । सेवा मुक्ति के बाद अब इस पूरे हरियाली उपवन को जिला प्रशासन को पूर्णतः शौप देना चाहते हैं ताकि उनके द्वारा लगाया गया उपवन एवं मंदिर पर शरारती तत्वों का नजर न पड़ेतथा भविष्य में पर्यटन स्थल के रूप में विकसित हो सके।
वृक्ष मित्र राजेंद्र दुबे ने प्रधानमंत्री ,मुख्यमंत्री, पर्यावरण मंत्री एवं कलेक्टर को कई बार लिख चुके हैं पत्र
अभी हाल ही में सूरजपुर कलेक्टर को दिए गए पत्र में वृक्ष मित्र राजेंद्र दुबे ने उल्लेख किया है कि उक्त स्थल पर निवृत्त श्री संकट मोचन पंचमुखी हनुमान मंदिर, एस ई सी एल के विस्थापित ग्राम करमपुर में जीवन की संपूर्ण कमाई लगाकर स्थापित किया है इसे जिला प्रशासन अपने संरक्षण में लेकर पर्यटन , दर्शनीय स्थल, एवं एवं बच्चों के पार्क के रूप में विकसित कर सूरजपुर जिला का प्रदेश में अंकित करें।
अपने आवेन मे पंडित राजेन्द्र कुमार दुबे ने अब तक प्रधानमंत्री, भारत सरकार सहित छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री पर्यावरण मंत्री एवं सूरजपुर जिला के कलेक्टर को अब तक भेजे गए पत्र की सत्यप्रतिलिपि भी संलग्न की है।
वृक्ष मित्र राजेंद्र दुबे ने कलेक्टर को मार्मिक पत्र लिखा
कलेक्टर को संबोधित करते हुए अपने पत्र में पंडित राजेंद्र दुबे लिखते हैं कि एक मजदूर जो विगत 38 वर्षों से निःस्वार्थ भाव से जनहित एवं समाज हित में पर्यावरण का कार्य करता आ रहा है जो आज भी निरन्तर जारी है। आपसे विनम्र आग्रह है कि इस स्थल का मौका निरीक्षण कर इसके संपूर्ण विकास हेतु कार्यवाही कर इस स्थल को सूरजपुर के नक्शे में पर्यटन/दर्शनीय स्थल के रूप में विकसित करने की कृपा करें तथा विगत 20 वर्षों से आधा किलोमीटर रोड निर्माण, बच्चों के मनोरंजन हेतु पार्क की व्यवस्था एवं इसके सौन्दर्याकरण का कार्य प्राथमिकता के आधार पर कराने की कृपा करें। सुरतपुर जिला कलेक्टर को 13 मई 2026 को आवेदन के साथ प्रधानमंत्री, भारत सरकार को प्रेषित पत्र की छायाप्रति मुख्यमंत्री, छ.ग. शासन , सूरजपुर कलेक्टर को प्रेषित पत्र की सत्यप्रतिलिपि भी सलग्न की है ।
ग्राम करमपुर के शरारती तत्व वृक्षों से लहलता बगीचा को हड़पने गड़ा रखी है गिद्ध दृष्टी
उक्त बंजर भूमि पर वर्षों से वृक्ष लगाकर विभिन्न प्रजातियों का पौधा तैयार कर विशाल उपवन तैयार करने वाले वृक्ष मित्र पंडित राजेंद्र दुबे सेवानिवृत के बाद अब थक चुके हैं इसी का फायदा उठाकर ग्राम करमपुर के कुछ शरारती तत्व अपनी पहुंच का दावा कर अपनी गिद्ध दृष्टि लगाए हुए है जबकि वृक्ष मित्र राजेंद्र दुबे चाहते हैं कि जिला कलेक्टर एक समिति बनाकर उसका पदेन अध्यक्ष एवं संरक्षण रहे ताकि इन हरे भरे फलदार वृक्षों की सुरक्षा ही नहीं अपितु एक सुंदर धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित हो सके।
वे कहते हैं कि पर्यावरण दिवस पर राज्य एवं केंद्र सरकार लाखों पौधा लगाने की दावा करती है तथा बचा नहीं पाती है जबकि हमने जिन पौधों को लगाया है उसका संरक्षण संवर्धन किया है ,आज वह उपवन के रूप में लह लाहा रहा है। केंद्र सरकार के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी को कई बार पत्र लिखने के बाद भी दुर्भाग्य से अभी तकइस ओर कोई कार्रवाई अब तक नहीं हो पाई है। वे बताते हैं कि प्रधानमंत्री कार्यालय से जिला कलेक्टर को पत्र आया था कार्रवाई करने हेतु कहां गया था। जिला कलेक्टर के निर्देश पर एक समिति भी स्थल का अवलोकन किया परंतु फिर क्या हुआ उसका अब तक पता नहीं चला।






























