संवाददाता: सुभाष गुप्ता
सूरजपुर : जिला मुख्यालय के मैयाथान रोड स्थित शासकीय प्राथमिक शाला के सामने मुख्य मार्ग से वार्ड क्रमांक 7 को जोर जाने वाली शासकीय सड़क पर कथित अतिक्रमण का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। वर्षों से सड़क को अतिक्रमण मुक्त कराने की मांग कर रहे स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि शिकायतों और आवेदनों का लंबा सिलसिला चलता रहा, लेकिन आज तक प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। नतीजतन, आम लोगों की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है।
विष्णु देव साय के चौपाल कार्यक्रम, महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के सूरजपुर प्रवास के दौरान, वर्तमान कलेक्टर सहित जिले के दो पूर्व कलेक्टरों को भी आवेदन देकर सड़क से कधित अतिक्रमण हटाने की मांग की थी। उनका कहना है कि हर बार आश्वासन मिला, लेकिन धरातल पर स्थिति जस की तस बनी हुई है। वार्डवासियों के अनुसार, यह सड़क कभी इतनी चौड़ी थी कि चारपहिया वाहन आसानी से आवागमन करते थे। समय के साथ सड़क किनारे मकानों और दुकानों के विस्तार के कारण कथित रूप से अतिक्रमण बढ़ता गया और आज स्थिति यह है कि वहां से मुश्किल से मोटरसाइकिल या साइकिल ही निकल पाती है। लोगों का कहना है कि जो सड़क कभी पूरे मोहल्ले का मुख्य संपर्क मार्ग थी, वह अब संकरी गली में तब्दील होकर रह गई है। स्थानीय निवासी सुभाष गुप्ता का दावा है कि शासकीय अभिलेखों में यह सड़क लगभग 15 डिसमिल भूमि पर दर्ज है, लेकिन वर्तमान में इसका बड़ा हिस्सा कथित अतिक्रमण की चपेट में है, जिससे सड़क का वास्तविक स्वरूप लगभग समाप्त हो चुका है।
'आपदा की स्थिति में बढ़ सकता है बड़ा खतरा '
स्थानीय नागरिकों ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी गंभीर चिंता जताई है। उनका कहना है कि पदि मोहल्ले में आग लगने जैसी कोई बड़ी घटना हो जाए तो अग्निशमन वाहन अंदर तक नहीं पहुंच सकेगा। वहीं गंभीर मरीज की સ્થિતિ મેં વુભેંસ મી સીધે ધર तक नहीं पहुंच पातो, जिससे मरीज को पहले मुख्य सड़क तक लोगों के सहयोग से उठाकर लाना पड़ता है। लोगों का कहना है कि यह स्थिति किसी भी समय बड़े हादसे का कारण बन सकतो है।
'फिर सौंपा आवेदन, कार्रवाई का इंतजार'
गत गुरुवार को वार्डवासियों ने एक बार फिर जिला प्रशासन को सामूहिक आवेदन सौंपकर सड़क का सीमांकन कराने, कथित अतिक्रमण हटाने तथा सड़क का चौड़ीकरण कर उसे उसके मूल स्वरूप में बहाल करने की मांग की है। अब लोगों की निगाहें प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं।
'नापजोख होती है, कार्रवाई नहीं
निवासियों का आरोप है कि शिकायत मिलने पर राजस्व विभाग के आरआई और पटवारी मौके पर पहुंचकर नापजोख की औपचारिकता तो पूरी कर लेते हैं, लेकिन इसके बाद मामला फाइलों में दबकर रह जाता है। वर्षों से कार्रवाई नहीं होने से लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। वार्डवासियों ने मांग की है कि शासकीय भूमि का विधिवत सीमांकन कर सड़क को अतिक्रमण मुक्त कराया जाए, ताकि आम नागरिकों को राहत मिल सके और वर्षों पुरानी समस्या का स्थायी समाधान हो सके। 3 साल से तारीख पेशी हो रहा है एसडीएम कार्यालय को जब फर्जी पट्टा मिलता है तो केश को खारिज कर देते हैं एक ऐसा न्याय है






























