गरियाबंद : दिवंगत शिक्षक स्व. परमानंद ध्रुव के पेंशन प्रकरण के निराकरण के लिए 50 हजार रुपये की कथित मांग से जुड़े मामले में गठित जांच समिति की कार्यवाही पर गंभीर प्रश्न उठाए गए हैं। पीड़िता श्रीमती संतोषी ध्रुव ने आरोप लगाया है कि जांच के दौरान प्रस्तुत तथ्यों की निष्पक्ष समीक्षा नहीं की गई तथा और जाँच टीम द्वारा अपने अभिमत में दोषी अधिकारियों को बचाने का प्रयास किया गया।
उल्लेखनीय है कि कार्यालय जिला शिक्षा अधिकारी, गरियाबंद के पत्र क्रमांक 2928/जि.शि.अ./सतर्कता/जांच/2026-27, दिनांक 05.06.2026 के आधार पर गठित जांच समिति, जिसमें वाय. आर. साहू (प्राचार्य, पाण्डुका), भगवानी देवांगन (प्राचार्य, अतरमरा) तथा वर्षा नेताम (प्राचार्य, धुमा) शामिल थे, ने मामले की जांच की।
पीड़िता संतोषी ध्रुव के अनुसार, उन्होंने 25 जून 2026 को शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पाण्डुका में जांच समिति के समक्ष लिखित बयान दिया, जिसमें स्पष्ट उल्लेख किया कि पेंशन प्रकरण के निराकरण के लिए प्रभारी विकासखंड शिक्षा अधिकारी फिंगेश्वर एवं लिपिक महेश्वर मार्कण्डेय द्वारा 50 हजार रुपये की मांग की गई थी। उन्होंने यह भी लिखित रूप से बताया कि आवश्यकता पड़ने पर उनके पास उपलब्ध ऑडियो रिकॉर्डिंग उच्च अधिकारियों को सौंपी जा सकती है।
पीड़िता का आरोप है कि जांच के दौरान ऑडियो रिकॉर्डिंग समिति के समक्ष प्रस्तुत ही नहीं की गई, इसके बावजूद जांच प्रतिवेदन में यह उल्लेख किया गया कि "ऑडियो में किस-किस की आवाज है, यह समझ में नहीं आ रहा।" उनका कहना है कि जब ऑडियो की विधिवत जांच ही नहीं की गई, तब इस प्रकार की टिप्पणी किस आधार पर की गई, यह गंभीर जांच का विषय है।
संतोषी ध्रुव ने आरोप लगाया कि उनकी शिकायत को मनगढ़ंत एवं असत्य बताकर दोषी अधिकारियों को बचाने का प्रयास किया गया, जिससे उन्हें गहरा मानसिक आघात पहुंचा है। उन्होंने कहा कि वे इस पूरे प्रकरण के संबंध में उपलब्ध साक्ष्यों सहित माननीय मुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़ शासन से शीघ्र मुलाकात कर शिकायत प्रस्तुत करेंगी तथा निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच की मांग करेंगी।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि आवश्यक हुआ तो जांच समिति की कार्यप्रणाली की भी स्वतंत्र जांच कराने की मांग की जाएगी, ताकि पूरे मामले के तथ्यों का निष्पक्ष परीक्षण हो सके और यदि किसी स्तर पर अनियमितता पाई जाती है तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।






























