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अगर आप पहली बार हरतालिका व्रत रख रहे हैं, तो जानिए इसकी पूजा विधि

Posted on :04-Sep-2024
अगर आप पहली बार हरतालिका व्रत रख रहे हैं, तो जानिए इसकी पूजा विधि

Hartalika Teej : हरतालिका तीज हिंदू धर्म का एक प्रमुख व्रत है, जो भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाया जाता है। हरतालिक तीज व्रत पति की लंबी उम्र और सफल वैवाहिक जीवन के लिए रखा जाता है। तीज का पहली बार व्रत रखने वाली महिलाओं के लिए जानने लायक जरूरी बातें। भाद्रपद की शुक्ल तृतीया को हस्त नक्षत्र में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने का विशेष महत्व है और कहा जाता है कि हरतालिका तीज का व्रत कुंवारी और सौभाग्यवती स्त्रियां करती हैं। हरतालिका तीज व्रत बिना अन्न और जल के रखा जाता है।

मान्यता है कि इस व्रत को सबसे पहले माता पार्वती ने भगवान शंकर को पति के रूप में पाने के लिए किया था। हरतालिका तीज व्रत करने से महिलाओं को सौभाग्य की प्राप्ति होती है। पंडित जी ने बताया की हरतलिका व्रत के लिए किन किन बातों का ध्यान रखना चाहिए। और किस विधि से पूजा करना चाहिए। 

पूजा-अर्चना से मिलता है विशेष आशीर्वाद

हरतालिका तीज व्रत का पौराणिक महत्व के बारे में बताया की हरतालिका तीज व्रत भगवान शिव और माता पार्वती के पुनर्मिलन के उपलक्ष्य में माता में मनाया जाता है, एक पौराणिक कथा के अनुसार माता पार्वती ने भगवान भोलेनाथ को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तप किया था, और भगवान शिव की आराधना में लीन हो गई। 

इस दौरान भाद्रपद में शुक्ल पक्ष की तृतीया के दिन हस्त नक्षत्र में माता पार्वती ने रेत से शिवलिंग का निर्माण किया और भोलेनाथ की आराधना में मग्न होकर रात्रि जागरण किया,माता पार्वती के कठोर तप को देखकर भगवान शिव ने उन्हें दर्शन दिए और पार्वती जी की इच्छानुसार उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया तभी से अच्छे पति की कामना और पति की दीर्घायु के लिए कुंवारी कन्या और सौभाग्यवती स्त्रियां हरतालिका तीज का व्रत रखती हैं और भगवान शिव व माता पार्वती की पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद प्राप्त करती हैं। 

हरतालिका तीज व्रत के नियम 

• जो भी महिलाएं एक बार हरतालिका तीज व्रत को रखना शुरू कर देती है उसके बाद इस व्रत को पूरे जिंदगी भर रखना होता है, इस व्रत को बंद नही कर सकते है। 

• यह हरतालिका तीज एक निर्जला व्रत है, इसमें किसी भी प्रकार से अन्न-जल ग्रहण नहीं किया जाता है। हरतालिका तीज पूजन प्रदोष काल यानी शाम के समय सूर्य के डूबने के समय और रात होने से पहले किया जाता है। 

• इस दिन व्रती महिलाओं को रातभर जगराता कर भजन-कीर्तन करना चाहिए और जागकर मिट्टी के बनाए शिवलिंग की प्रहर अनुसार पूजा करनी चाहिए है, अगले दिन मां पार्वती की पूजा-आरती कर सिंदूर चढ़ाया जाता है और व्रत का पारण ककड़ी या खीरा और हलवे से किया जाता है। 

• हरतालिका तीज की पूजा और उपवास का संकल्प लेकर व्रत को शुरू करना चाहिए, और व्रत के दौरान हरतालिका तीज व्रत कथा जरूर सुनना चाहिए, व्रत के दिन मेहंदी सहित 16 श्रृंगार करना अनिवार्य है। 

• पूजा के लिए शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की मिट्टी की प्रतिमा हाथों से बनाकर पूजा करते हैं और अगले दिन सुबह इन्हें विधिवत विसर्जित करने के बाद पारण ही किया जाता है। 


• पूजा के समय सुहाग की सामान माता पार्वती को अर्पित करते हैं। पूजा के बाद सुहाग की सामग्री को किसी ब्राह्मण स्त्री या गरीब विवाहित महिला को दे देना चाहिए इससे व्रत का पुण्य फल बढ़ जाता है। 

• इनके साथ ही हरियाली तीज के काला कपड़ा धारण नही करना चाहिए, व्रत के दिन सोना नहीं चाहिए, अन्यथा व्रत भंग हो जाता है।(एजेंसी)

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शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी को पूरा करेंगी 5 फूड्स, आज से ही बना लें अपनी डाइट का हिस्सा

Posted on :03-Sep-2024
शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी को पूरा करेंगी 5 फूड्स, आज से ही बना लें अपनी डाइट का हिस्सा

Hemoglobin Level: शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी हो जाए, तो एनीमिया की कंडीशन पैदा हो जाती है। आमतौर पर हीमोग्लोबिन के जरिए शरीर में खून के स्तर का अनुमान लगाया जाता है। हीमोग्लोबिन शरीर के सभी अंगों तक ऑक्सीजन ले जाने का काम करता है। जब हीमोग्लोबिन का स्तर सामान्य से कम हो जाता है, तो लोगों को थकान, कमजोरी और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं झेलनी पड़ती हैं। हीमोग्लोबिन बढ़ाने के लिए खाने-पीने का विशेष ध्यान रखना पड़ता है। कई फूड्स में ऐसे पोषक तत्व होते हैं, जो तेजी से हीमोग्लोबिन लेवल बढ़ा सकते हैं। 

आयरन हीमोग्लोबिन प्रोडक्शन को बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकता है और इससे एनीमिया से छुटकारा मिल सकता है। हालांकि जिन लोगों में हीमोग्लोबिन की कमी खाने-पीने से दूर नहीं हो पाती है, उन्हें डॉक्टर आयरन सप्लीमेंट्स लेने की सलाह देते हैं, ताकि शरीर में इस जरूरी तत्व की कमी न रहे। 

हरी पत्तेदार सब्जियां

पालक को आयरन का बेहतरीन सोर्स माना जा सकता है. पालक खाने से शरीर में हीमोग्लोबिन प्रोडक्शन बढ़ सकता है। इसमें विटामिन C भी होता है, जो आयरन के अब्जॉर्प्शन को बेहतर बनाता है। पालक खाना बेहद लाभकारी हो सकता है। शरीर में हीमोग्लोबिन की मात्रा को बूस्ट करने के लिए हरी पत्तेदार सब्जियां अपने आहार में शामिल करना बहुत जरूरी है। इसके लिए साग, पालक, शिमला मिर्च और ब्रोकली खाना चाहिए। इसके अलावा मौसमी फल-सब्जियां भी आप ले सकते हैं। बता दें, इनमें विटामिन ए, बी 12, मैग्नीशियम जैसे कई पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर में हीमोग्लोबिन बढ़ाने में मदद करते हैं।

चुकंदर

चुकंदर खाने से शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी दूर हो सकती है. चुकंदर में आयरन, फोलिक एसिड और विटामिन C होते हैं, जो हीमोग्लोबिन की मात्रा को बढ़ाने में मदद करते हैं। चुकंदर का जूस पीना आपके लिए फायदेमंद हो सकता है। 

दालें  

हीमोग्लोबिन बढ़ाने के लिए दालों का सेवन करना भी फायदेमंद हो सकता है। मसूर, चना और राजमा में भरपूर मात्रा में आयरन व प्रोटीन होता है। इन्हें नियमित रूप से खाने से आपके शरीर में आयरन की कमी पूरी हो सकती है और हीमोग्लोबिन लेवल बढ़ सकता है। 

अनार

अनार के सेवन से भी ब्लड काउंट में इजाफा होता है। इसमें प्रोटीन, विटामिन ए, सी और ई, फाइबर, कार्बोहाइड्रेट और भरपूर मात्रा में आयरन होता है। ऐसे में ये आपके हीमोग्लोबिन को बढ़ाने में काफी फायदेमंद है। इसलिए डॉक्टर्स भी खून की कमी होने पर इसका जूस पीने की सलाह देते हैं।

खजूर

शरीर में खून की कमी पूरी करने में खजूर भी बेहद असरदार है। लेकिन बता दें कि अगर आप डायबिटीज के मरीज हैं, तो इसकी जगह आप पंपकिन सीड्स का सेवन कर सकते हैं। आयरन और विटामिन बी कॉम्प्लेक्स की कमी भी इससे पूरी हो जाती है। (एजेंसी)

 

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सिर्फ दो चीजों की रोटी खाने से आपका मोटापा होगा कम ? यकीन नहीं होता तो कुछ दिन आजमा के देखें, पेट की चर्बी होगी कम

Posted on :03-Sep-2024
सिर्फ दो चीजों की रोटी खाने से आपका मोटापा होगा कम ? यकीन नहीं होता तो कुछ दिन आजमा के देखें, पेट की चर्बी होगी कम

 

Weight Loss Tips- गेंहू और चावल हमारे देश का दो प्रमुख अनाज है जिनसे कई चीजें बनाकर खाई जाती है। भारत देश में गेहूं और चावल को अलग-अलग रूपों में बनाकर खाया जाता है। उत्तर भारत में अक्सर हम लोग गेहूं के आटे से बनी रोटियां खाते हैं, ये रोटियां हमारी जरूरत के अधिकांश कार्बोहाइड्रैट की भरपाई कर देता है जिससे शरीर में एनर्जी बनती है और हम इसके सहारे दिन भर काम करते रहते हैं। रोटी के साथ अक्सर हम दाल या सब्जी का सेवन करते हैं और पूरा दिन इस पर टिके रहते हैं। लेकिन यदि आपको अपना वजन कम करना है, तो गेहूं से बनी रोटियों का मोह छोड़ना होगा क्योंकि इसमें कैलोरी बहुत होती है और यह शरीर में अतिरिक्त चर्बी को बढ़ा सकती है। ऐसे में आपको हम यहां दो खास तरह की रोटियां के बारे में बता रहे हैं जिन्हें खाकर आप अपने मोटापे पर बहुत हद तक काबू पा सकते हैं। आइए जानते हैं-

दो तरह के आटे से बनी रोटियां

1. रागी के आटे की रोटी-रागी यानी फिंगर मिलेट।  ये छोटे से गोल मटोल दाने में इतना डेंस पौष्टिक तत्व होता है कि आप सोच में नहीं सकते।  वैज्ञानिकों ने जब इसके गुण के बारे में ज्यादा जाना तो यह सुपरफूड बन गया। अगर आप वजन कम करना चाहते हैं, तो रागी के आटे की रोटियां खाइए। इसमें इतना अधिक फाइबर होता है कि अगर आप इसे सुबह नाश्ते में खा लें तो दिन भर आपको भूख का अहसास बिल्कुल कम हो जाएगा। रागी में अत्यधिक मात्रा में कैल्शियम, आयरन और एसेंशियल एमिनो एसिड होता है। हाई फाइबर के कारण इसका डाइजेशन बहुत स्लो होता है जिससे ब्लड शुगर भी कंट्रोल रहता है।. रागी के आटे से बनी रोटी को आप कई चीजों के साथ खा सकते हैं। इसे दाल, विभिन्न तरह की सब्जियां और यहां तक कि छाछ के साथ भी खा सकते हैं। हालांकि यदि आपको थायराइड की समस्या है, तो आपको रागी की रोटी खाने से बचना चाहिए। फिर आपके लिए आगे बताए जा रहे रोटी फायदेमंद साबित हो सकती है। 

2. ज्वार की रोटी सुबह के नाश्ते के लिए एकदम परफेक्ट है। ज्वार की रोटी में अत्यधिक मात्रा में डायट्री फाइबर होता है। ज्वार की रोटी से आपका डाइजेशन बुलंद रहेगा और जब डाइजेशन ठीक रहेगा तो अधिकांश बीमारियां यूं ही शरीर से दूर भागती रहेगी। दूसरी तरफ जबर्दस्त डायट्री फाइबर के कारण ज्वार की रोटी को खाने के बाद बहुत देर तक भूख नहीं लगेगी। बहुत देर तक भूख नहीं लगने से आप ज्यादा कैलोरी नहीं ले पाएंगे और इससे यूं ही वजन आप बढ़ा नहीं पाएंगे। ज्वार में बहुत अधिक तरह के एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं, इसके साथ ही इसमें प्रोटीन, मैग्नीशियम, फॉस्फोरस आदि भरा रहता है।  ज्वार का ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम रहता है, इसलिए यह ब्लड शुगर को मैंटेन रखता है और वजन को बढ़ने नहीं देता। ज्वार की रोटी को भी आप दाल और विभिन्न तरह की सब्जियों और छाछ आदि के साथ खा सकते हैं। ज्वार में ग्लूटीन बेहद कम होता है इसके कारण यह पथरीला हो जाता है यानी टाइट हो जाता है, इसलिए जब आप ज्वार की रोटी बनाए तो इसके आटे को गूंथते समय गर्म पानी का इस्तेमाल करें। इससे रोटी की लोई सही से बन पाएगी वरना यह बहुत टाइट हो जाएगा। हालांकि जिसे पेट की बीमारी सेलिएड डिजीज है उन्हें ज्वार की रोटी खाने से बचना चाहिए। 

दोनों में से कौन बेहतर

यह डिपेंट करता है कि आपकी हेल्थ किस तरह की है। यदि आपकी हेल्थ अच्छी है तो दोनों तरह की रोटियां वजन कम करने के लिए परफेक्ट है लेकिन यदि कोई कंडीशन है, तो आपको डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए।  जैसा कि उपर बताया गया है कि थायराइड वाले को रागी और सिलिएक डिजीज वाले को ज्वार की रोटी से परहेज करना चाहिए। (एजेंसी)

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जानिए बरसात के दिनों में अपने घर के गार्डन की देखभाल कैसे करें, ताकि पेड़-पौधे कभी नहीं होंगे खराब

Posted on :02-Sep-2024
जानिए बरसात के दिनों में अपने घर के गार्डन की देखभाल कैसे करें, ताकि पेड़-पौधे कभी नहीं होंगे खराब

Care Of Plants In Rain: आज के दौरान में हर किसी व्यक्ति को अपने घर और गार्डन में गार्डिनिंग करने का शौक होता हैं और इसमें वह लोग कई प्रकार के पौधे भी लगाते हैं। ऐसे में बारिश का मौसम में जहां बारिश का पानी पौधों के लिए फायदेमंद हैं, तो इसके नुकसान भी हैं। बारिश के कारण गार्डन में रखे जाने वाले पौधों को नुकसान भी होता हैं, ऐसे में जानते है बारिश में किस तरह अपने किचन गार्डन का ध्यान रखना चाहिए। 

इन दिनों कभी बारिश तो कभी तेज धूप रहती है।  इस मौसम में इंसान तो प्रभावित होता ही है साथ ही घर के बगीचे में लगे पौधों की भी विशेष देखरेख की जरूरत होती है।  मानसून के दौरान पौधों का खास ख्याल रखने की जरूरत होती है। लगातार बारिश के चलते और हवा में नमी होने के वजह से पौधों में कम पानी देना चाहिए और यदि गमलों में पानी भर जाता है,तो समय-समय पर उन्हें खाली करते रहें। इससे पौधों को नुकसान नहीं पहुंचेगा। लंबी बारिश के बाद 2 से 3 दिनों के बाद ही पौधों को पानी देना चाहिए। गमलों में ज्यादा पानी देने से कहीं-कहीं पौधे भी नष्ट हो सकते हैं। 

सही मात्रा में यदि पौधों को धूप मिले तो वह अच्छे से फल फूल सकते हैं। इसके लिए ग्रीन नेट से पौधों को ढकना जरूरी है। इसके साथ ही पोधौं के लिए गोबर की खाद, अच्छी मिट्टी, बालू आदि बराबर मात्रा में मिलाकर मिट्टी तैयार करें। उसी में पौधे लगाएं। मिट्टी, प्रॉपर पानी और कभी-कभी रोशनी में रख देने से ये प्लांट्स जल्दी खराब नहीं होंगे। 

गार्डन में गड्ढे और नालियां बनाएं

अत्यधिक बारिश से गार्डन में जलभराव की समस्या हो सकती है। इसको रोकने के लिए आपको बगीचे में पर्याप्त गड्ढे और नालियां बनाना बेहद जरूरी है। नालियां बनाते वक्त ध्यान रखें कि यह ढलान पर हों। तभी ये पानी को आसानी से बाहर निकालने में मदद कर सकते हैं।

पौधों को सहारा देने के लिए करें उपाय

तेज हवाओं और बारिश से पौधों को बचाने के लिए उन्हें सहारा देना जरूरी है। इसके लिए आप लकड़ी के खंभे या बांस की छड़ें का उपयोग करके पौधों को सहारा दे सकते हैं। ऐसा करने से आपके पौधे तेज तूफान से बच सकते हैं।

बीमार पौधों को हटा दें

बारिश के मौसम में बीमारियां और कीट पनपने की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए, अगर आपके बगीचे में कोई बीमार या कीड़े लगे हुए पौधे हैं, तो उसे पहले ही हटा दें। यह उपाय आपके अन्य पौधों को बीमारी से बचाने में मदद कर सकता है। (एजेंसी) 

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पुराना माइग्रेन हो या सिर दर्द, अपराजिता के फूल का काढ़ा पीने से मिल जाएगा छुटकारा, जानें एक्सपर्ट की राय

Posted on :02-Sep-2024
पुराना माइग्रेन हो या सिर दर्द, अपराजिता के फूल का काढ़ा पीने से मिल जाएगा छुटकारा, जानें एक्सपर्ट की राय

Ayurveda tips for migraine :  आजकल भागदौड़ की जिन्दगी में हम माइग्रेन सिर दर्द का गंभीर बीमारी से ग्रसित होते जा रहे हैं। इसमें दर्द कई दिनों तक बना रहता है, जिसके चलते आपकी दिनचर्या पर बुरा असर पड़ता जाता है। इसमें सिर में दर्द के साथ उल्टी और मतली भी महसूस होती है। अगर आप भी इस परेशानी से लंबे समय से जूझ रहे हैं, तो फिर आप यहां पर एक्सपर्ट के बताए नुस्खे को अपना सकते हैं,जिससे न सिर्फ माइग्रेन बल्कि पुराने से पुराना सिरदर्द और बुखार भी ठीक हो सकता है। 

दरअसल, हम यहां पर आपको अपराजिता फूल के काढ़े को पीने की बात कर रहे हैं, जिसके बारे में  एक्सपर्ट डॉक्टर प्रियंका त्रिवेदी ने अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर बताया है। इसको बनाने के लिए आपको 4 से 5 अपराजिता के फूल को 1 कप पानी में उबाल लेना है फिर छानकर चाय की तरह सिप-सिप करके पी लेना है, इसको प्रतिदिन पिएंगे तो जल्द ही माइग्रेन के दर्द से छुटकारा मिलेगा ही साथ में पुराना बुखार और शरीर का दर्द भी दूर होगा। 

इस नुस्खे को इस तरह अपनाया जा सकता है

माइग्रेन के दर्द में लौंग का पाउडर 1/4 चम्मच एक गिलास पानी में एक रात के लिए भिगोकर रख देना है, फिर अगली सुबह पी लेना है. ऐसा आप 2 महीने लगातार कर लेते हैं, तो आपको इसका फायदा जल्दी महसूस होगा। 

ठंडी या गर्म पट्टी: दर्द वाली जगह पर ठंडी या गर्म पट्टी रखने से राहत मिल सकती है। ठंडी पट्टी से सूजन कम हो सकती है,जबकि गर्म पट्टी से मांसपेशियों को आराम देता है। 

पानी पीना: माइग्रेन के दौरान शरीर में पानी की कमी हो सकती है, इसलिए पानी पीते रहें इससे निर्जलीकरण से बचा जा सकता है। (एजेंसी)

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हेल्दी लाइफ के लिए दिन की शुरुआत इन 5 नियमों से कीजिए, जिंदगी बदल देगा ये अभ्यास

Posted on :26-Aug-2024
हेल्दी लाइफ के लिए दिन की शुरुआत इन 5 नियमों से कीजिए, जिंदगी बदल देगा ये अभ्यास

Morning habits for healthy and fit: हेल्दी लाइफ के बारे में ज्यादातर लोगों के मन में नकारात्मक बातें ही रहती हैं. अक्सर लोग कहते हैं कि आजकल के जमाने में हेल्दी रहना बहुत मुश्किल है. लेकिन यकीन मानिए हेल्दी रहना इतना भी मुश्किल नहीं है. बस इसके लिए दिनचर्या में कुछ सुधार करनी पड़ती है. अगर आप सही डाइट लें, रोजाना सही एक्सरसाइज करें, पर्याप्त नींद लें, सुकून से खुश रहे तो हेल्दी रहना बिल्कुल भी मुश्किल नहीं है. आइए इसकी शुरुआत हम सुबह से आपको करवाते हैं. सुबह के कुछ खास नियम से दिन की शुरुआत कीजिए, इससे आप हमेशा फिट और हेल्दी रहेंगे.

हेल्दी रहने के शुरुआती सूत्र

1. ध्यान से शुरुआत– टीओआई की खबर के मुताबिक यदि आप हेल्दी रहना चाहते हैं तो दिन की शुरुआत छोटे से ध्यान से कीजिए. साइकेट्री जर्नल में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक सुबह-सुबह मेडिटेशन करने से आपको दिन भर तनाव और एंग्जाइटी नहीं होगी. इसके लिए ज्यादा नहीं बल्कि 10 से 15 मिनट का समय दें. बिस्तर से उठते ही सबसे पहले ये काम कर लें. कुछ ही दिनों में फर्क दिखने लगेगा.

2. लेमन वाटर- दिन भर आपको तरोताजा रहना पड़ता है. इसलिए आपको भरपूर पानी की जरूरत होती है. ऐसे में मेडिटेशन करने के बाद या पहले एक गिलास गुनगुने पानी और नींबू के साथ दिन की शुरुआत कीजिए. नींबू में विटामिन सी होता है जो इम्यूनिटी को बढ़ाएगा और मेटाबोलिज्म को भी बूस्ट करेगा. जर्नल ऑफ क्लीनिकल बायोकेमिस्ट्री की रिसर्च के मुताबिक नियमित रूप से नींबू पानी शरीर में अतिरिक्त चर्बी को घटा देता है और इंसुलिन रेजिस्टेंस का जोखिम कम करता है. इससे स्किन की सुंदरता भी बढ़ती है.

3. फिजिकली एक्टिव- मेडिटेशन और लेमन वाटर के बाद अब समय आ गया है कि एक्सरसाइज का. एक्सरसाइज में वो ताकत है तो आपके शरीर को हेल्दी और हसीन तरीन बना सकती है. इससे वजन कम रहता है डाइजेशन बूस्ट होता है. अगर डाइजेशन सही रहे और वजन कम हो तो मुश्किल से ही कोई बीमारी हो. ब्रिटिश जर्नल ऑफ स्पोर्ट्स की रिसर्च के मुताबिक सुबह-सुबह एक्सरसाइज करने से दिमाग सही से काम करता है और बौद्धिक क्षमता बढ़ जाती है. इसके लिए आप किसी एक्सरसाइज को चुन सकते हैं. जरूरी नहीं ये जिम में ही हो. आप साइक्लिंग, रनिंग, जॉगिंग इत्यादि कर सकते हैं. योग से भी बहुत फायदा होगा.

4. पोषक तत्वों से भरपूर ब्रेकफास्ट- इन सबके बाद अब समय आता है पावरफुल नाश्ते का. सुबह का नाश्ता ऐसा होना चाहिए जो आपको पूरे दिन भर एनर्जी देता रहे. इसके लिए इस तरह के फूड का चयन करें जिसमें ज्यादा से ज्यादा पोषक तत्व है. सबसे पहले आप कुछ भीगे हुआ बादाम खाएं और नाश्ते में साबुत अनाज से बनी चीजें और हरी पत्तीदार सब्जियां जरूर हो. अंडा बी इसके लिए बेहतरीन साबित हो सकता है. इसके साथ ही ताजे फल को जरूर शामिल करें. ये कुदरती चीजें आपके हार्ट को बीमारियों से बचाएगी और दिमाग को तरोताजा रखेगा.

5. ग्रेटीट्यूट- ग्रेटीट्यूट का मतलब है लोगों का आभार प्रकट करना. सुबह-सुबह आप अपनों में ही या किसी को भी आभार प्रकट करें. यानी आपको लगे कि इस व्यक्ति ने हमारे जीवन को एक पल के लिए भी बेहतरीन महसूस कराया तो उस व्यक्ति का अभार प्रकट करें. ऐसा करने से किसी दूसरे के प्रति मन में द्वेष या ईर्ष्या नहीं रहेगी. यह सोचें कि हर किसी की मेरे जीवन में योगदान है इसलिए उन सबका आभार प्रकट करना कर्तव्य है. इससे मन में नकारात्मक भावना नहीं आएगी और मन हमेशा खुश रहेगा. अगर आप अंदर से खुश रहेंगे तो शारीरिक और मानसिक दोनों तरह से हेल्दी रहेंगे.(एजेंसी)

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क्या आपने खाएं लाल आलू? भर-भर के मिलेगी एनर्जी...

Posted on :20-Aug-2024
क्या आपने खाएं लाल आलू? भर-भर के मिलेगी एनर्जी...

Health News : सभी सब्जियों का राजा कहलाने वाला आलू तो आपने कई बार खाया होगा, लेकिन क्या आपने कभी लाल आलू का स्वाद चखा है? अगर नहीं, तो आज हम आपको लाल आलू से बनने वाली डिश और इसके सेवन के फायदों के बारे में बताने जा रहे हैं.

सभी सब्जियों का राजा कहलाने वाला आलू तो आपने कई बार खाया होगा, लेकिन क्या आपने कभी लाल आलू का स्वाद चखा है? अगर नहीं, तो आज हम आपको लाल आलू से बनने वाली डिश और इसके सेवन के फायदों के बारे में बताने जा रहे हैं. बीकानेर के बाजारों में लाल आलू की बड़ी मांग है. इन आलू को पहाड़ी आलू के नाम से भी जाना जाता है.

दुकानदार श्याम तंवर ने बताया कि ये लाल आलू, जिन्हें पहाड़ी आलू भी कहा जाता है, बाजार में 20 रुपए प्रति किलो की दर से बेचे जाते हैं. ये आलू पंजाब से आते हैं और बेहद स्वादिष्ट होते हैं. लाल आलू का उपयोग सब्जी के अलावा चिप्स, पकोड़े, आलू परांठे, आलू चाट, आलू सलाद आदि में किया जाता है. आलू को हर घर में सबसे सामान्य और प्रिय सब्जी माना जाता है, क्योंकि इसे किसी भी सब्जी में मिलाकर तैयार किया जा सकता है.

आयुर्वेदिक डॉक्टर अमित कुमार के अनुसार, लाल आलू खाने से कई प्रकार के स्वास्थ्य लाभ होते हैं. ये आलू पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं और इनमें एंटीऑक्सीडेंट्स, विशेष रूप से एंथोसायनिन, अधिक मात्रा में पाया जाता है, जिसकी वजह से इसका रंग लाल होता है. लाल आलू में फाइबर, पोटेशियम, विटामिन बी6, विटामिन सी और अन्य एंटीऑक्सीडेंट्स भरपूर मात्रा में होते हैं.

लाल आलू के फायदे:

ब्लड प्रेशर मेंटेन रखने में मददगार: लाल आलू में पाया जाने वाला पोटेशियम ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में सहायक होता है, जिससे हाइपरटेंशन और हार्ट अटैक का खतरा कम होता है.

इम्युनिटी को मजबूत बनाता है: लाल आलू में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स और विटामिन सी हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद करते हैं, जिससे हमारा शरीर बीमारियों से लड़ने में सक्षम होता है.

पाचन क्रिया को सुधारता है: लाल आलू में डाइटरी फाइबर पाया जाता है, जो पाचन क्रिया को मजबूत बनाता है और आंतों की सेहत को बढ़ावा देता है.

मानसिक स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद: लाल आलू में मौजूद विटामिन सी मानसिक स्वास्थ्य को बनाए रखने में सहायक है. यह मेमोरी पावर और ध्यान केंद्रित करने की शक्ति को बढ़ाता है.

एनर्जी से भरपूर: लाल आलू में कार्बोहाइड्रेट्स की भरपूर मात्रा होती है, जो शरीर को ऊर्जा प्रदान करती है, जिससे आप पूरे दिन ऊर्जावान बने रहते हैं.

स्किन हेल्थ में सुधार: लाल आलू में विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट्स की उच्च मात्रा होती है, जो त्वचा के स्वास्थ्य को बढ़ावा देती है और इसे स्वस्थ और चमकदार बनाए रखती है.

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गुरु पूर्णिमा के शुभ अवसर पर अखिल भारतीय मानव कल्याण ट्रस्ट के संस्थापक डॉ हृदयेश कुमार ने डायबिटीज के लक्षण और बचाव के विस्तार से उपाय बताए

Posted on :22-Jul-2024
गुरु पूर्णिमा के शुभ अवसर पर अखिल भारतीय मानव कल्याण ट्रस्ट के संस्थापक डॉ हृदयेश कुमार ने  डायबिटीज के लक्षण और बचाव के विस्तार से उपाय बताए

फरीदाबाद हरियाणा : बल्लबगढ़ के तिरखा कॉलोनी शिव मंदिर परिसर में गुरु पूर्णिमा के शुभ अवसर पर पूजा अर्चना कर डायबिटीज पर विशेस रूप से चर्चा करते हुए विस्तार से जानकारी दी 

  • टाइप 1 मधुमेह – इंसुलिन डिपेंडेंट डायबिटीज
  • टाइप 2 मधुमेह – नॉन-इंसुलिन डिपेंडेंट डायबिटीज 

खुशी के हर पल में मिठाई का होना हमारी परंपरा का एक अभिन्न भाग रहा है। दिवाली हो या होली, लोग मीठे से बिल्कुल भी परहेज नहीं करते हैं। लेकिन आज के भागदौड़ भरे जीवन में यह मीठा धीरे-धीरे कई बीमारियों का कारण बन रहा है, जिनमें से सबसे प्रमुख है मधुमेह या डायबिटीज। यह एक ऐसी बीमारी है, जो एक बार हो जाए तो जीवन भर साथ रहती है। अनियंत्रित मधुमेह हृदय रोग, स्ट्रोक, नर्व डैमेज, गुर्दे की बीमारी और अंधापन जैसी गंभीर समस्याओं को जन्म दे सकता है। इसलिए, अपने मधुमेह को प्रबंधित करने और अपने रक्त शर्करा स्तर को नियंत्रण में रखने का सबसे अच्छा तरीका है कि आप अपने डॉक्टर के साथ परामर्श करें या हमारे  एंडोक्राइनोलॉजिस्ट डॉक्टरों से बात करें।

डायबिटीज के प्रकार

टाइप 1 मधुमेह – इंसुलिन डिपेंडेंट डायबिटीज

डायबिटीज के सभी प्रकारों में टाइप 1 डायबिटीज एक साधारण प्रकार है। यह स्थिति तब उत्पन्न होती है जब पैंक्रियाज इंसुलिन का उत्पादन नहीं कर पाता है। डायबिटीज का यह प्रकार जेनेटिक है, जिसकी पहचान बचपन में ही हो जाती है और बचपन से ही इसका बचाव संभव होता है। सामान्यतः इस प्रकार के मधुमेह में कम उम्र के लोगों को इंसुलिन की जरूरत पड़ती है। फिलहाल इस स्थिति का कोई उपचार उपलब्ध नहीं है, लेकिन इसको सही समय पर पहचान कर इस स्थिति का इलाज संभव है। 

टाइप 2 मधुमेह – नॉन-इंसुलिन डिपेंडेंट डायबिटीज 

टाइप 2 डायबिटीज को सबसे आम प्रकार का डायबिटीज माना जाता है। मुख्यतः यह डायबिटीज किशोरों को सबसे ज्यादा प्रभावित करता है। इस प्रकार के डायबिटीज में पैंक्रियाज पर्याप्त मात्रा में इंसुलिन का निर्माण नहीं कर पाता है, जिसके कारण रक्त में ग्लूगोज की मात्रा बढ़ती जाती है। मुख्य रूप से इस रोग के कारण मोटापा और अधिक मीठा भोजन खाना है। 


गर्भावधि मधुमेह या गर्भावस्था मधुमेह: गर्भावस्था के दौरान, कई महिलाएं के शरीर में रक्त शर्करा स्तर बढ़ जाता है। यह इसलिए होता है, क्योंकि उस दौरान महिला का शरीर इंसुलिन के प्रति संवेदनशील नहीं होता है।

प्रीडायबिटीज: इसे आप टाइप 2 डायबिटीज से पहले वाला स्टेज मान सकते हैं। इसमें रक्त में ग्लूकोज का स्तर बॉर्डर लाइन पर होता है, जिसके इलाज के लिए जीवनशैली में बदलाव करने को कहा जा सकता है। 

डायबिटीज के लक्षण और उपाय?

मधुमेह के लक्षण मधुमेह के प्रकार के आधार पर भिन्न होते हैं, लेकिन कुछ सामान्य लक्षण होते हैं जैसे - 

  • प्यास और भूख में अचानक वृद्धि होना
  • ज़्यादा यूरिनेशन होना
  • थकान
  • धुंधली दृष्टि
  • घाव का धीरे-धीरे भरना 
  • हाथ और पैर में झुनझुनी या सुन्न होना
  • यीस्ट संक्रमण या यूरिनरी ट्रैक्ट संक्रमण

मधुमेह का इलाज कई कारकों पर आधारित होता है, जैसे मधुमेह के प्रकार और आयु, समग्र स्वास्थ्य और रक्त शर्करा के स्तर। डायबिटीज के कुछ सामान्य उपचार इस प्रकार है - 

दवाएं: मधुमेह के प्रकार के आधार पर, ब्लड ग्लूकोज के स्तर को प्रबंधित करने के लिए दवाएं जैसे इंसुलिन, मेटफॉर्मिन, इत्यादि का सुझाव दिया जा सकता है। 

जीवनशैली में बदलाव: स्वस्थ जीवनशैली में बदलाव करना जैसे स्वस्थ आहार का पालन, नियमित व्यायाम करना और जरूरत पड़ने पर वजन कम करना रक्त शर्करा स्तर को प्रबंधित करने में मदद कर सकता है।

रक्त शर्करा की निगरानी: रक्त शर्करा स्तर की नियमित निगरानी पैटर्न की पहचान करने और उपचार के निर्णयों को निर्देशित करने में मदद कर सकती हैं।

शिक्षा और समर्थन: मधुमेह की जानकारी रख कर तथा एक पंजीकृत एंडोक्राइनोलॉजिस्ट डाइटिशियन और डॉक्टर की मदद से स्व-देखभाल और प्रबंधन कर सकते हैं। इससे रोगी को बहुत लाभ मिलेगा।

डायबिटीज में क्या खाना चाहिए?

मधुमेह के प्रबंधन के लिए स्वस्थ और संतुलित आहार बहुत महत्वपूर्ण है। मधुमेह में स्वस्थ भोजन के लिए कुछ सामान्य दिशा-निर्देश दिए जाते हैं जैसे - 

संपूर्ण खाद्य पदार्थों पर ध्यान दें: साबुत अनाज, ताजे फल और सब्जियां, लीन प्रोटीन और स्वस्थ फैट चुनें।

कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स (जीआई) वाले खाद्य पदार्थ चुनें: कम जीआई मूल्य वाले खाद्य पदार्थों से रक्त शर्करा के स्तर में वृद्धि होने की संभावना कम होती है। उदाहरण के तौर पर देखें तो गैर-स्टार्च वाली सब्जियां, साबुत अनाज, नट्स और फलियां शामिल हैं।

प्रोसेस्ड फूड को सीमित करें: प्रोसेस्ड फूड को सीमित करने से रक्त शर्करा स्तर को नियंत्रित करने में बहुत मदद मिलती है। 

आहार में नियंत्रण: किसी भी भोजन का बहुत अधिक सेवन करने से रक्त शर्करा स्तर बढ़ सकता है। प्रयास करें कि हर कुछ समय में थोड़ा-थोड़ा खाएं।

कार्बोहाइड्रेट: कार्बोहाइड्रेट रक्त शर्करा के स्तर पर बढ़ा सकता है, इसलिए कार्बोहाइड्रेट के स्वस्थ स्रोत जैसे साबुत अनाज, फलों और सब्जियों को चुनें और कितना भोजन आप कर रहे हैं, इसकी निगरानी करें। 

हाइड्रेटेड रहें: खूब पानी पीने से रक्त शर्करा के स्तर को स्थिर रखने और डिहाइड्रेशन को रोकने में मदद मिलती है।

डायबिटीज में दर्द शरीर के कई हिस्सों में हो सकता है, जिनमें से डायबिटीज में पैर दर्द होना एक आम समस्या है। इसके अतिरिक्त डायबिटीज के कारण हाथ में भी दर्द होता है। दर्द के साथ रोगी को शरीर के विभिन्न अंगों में झुनझुनी और जोड़ों में दर्द और ऐंठन का सामना करना पड़ता है।

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बड़ा कारगर है यह जंगली पौधा, डिलीवरी के बाद ब्रेस्ट मिल्क बढ़ाने में रामबाण...

Posted on :11-Jul-2024
बड़ा कारगर है यह जंगली पौधा, डिलीवरी के बाद ब्रेस्ट मिल्क बढ़ाने में रामबाण...

Shatavari plant benefits: कई बार डिलीवरी के बाद महिलाओं में दूध नहीं बनने की शिकायत देखी जाती है. इसके लिए लोग डॉक्टर से सलाह लेते हैं. वहीं शहर से दूर रहने वाले आदिवासी जंगल में मिलने वाले खास तरह के पौधे का इस्तेमाल करते हैं. आइए जानते हैं. 

पलामू. कई बार डिलीवरी के बाद महिलाओं में दूध नहीं बनने की शिकायत देखी जाती है. इसके लिए लोग डॉक्टर से सलाह लेते हैं. वहीं शहर से दूर रहने वाले आदिवासी जंगल में मिलने वाले खास तरह के पौधे का इस्तेमाल करते हैं. जिससे डिलीवरी के बाद महिलाओं के दूध आसानी से बनने लगता है. इसके साथ साथ ये दूसरी कई बीमारियों में भी रामबाण है.

आदिवासी महिला नीलम देवी बताती हैं कि जंगल में मिलने वाला सतावर (शतावरी) नामक पौधा बेहद लाभदायक है. इसका इस्तेमाल वो तीन चार साल से कर रही हैं. इसका पाउडर खून की कमी के साथ कमजोरी जैसी समस्या को दूर करता है.

दूध बनाने में करता है मदद

उन्होंने कहा कि सतावर का पाउडर डिलीवरी के बाद महिलाओं के लिए किसी वरदान से कम नहीं है. इसमें मौजूद पोषक तत्व दूध बनाने में मदद करते हैं. जिन महिलाओं के दूध नहीं बन रहा है, वो महिलाएं इसका इस्तेमाल कर सकती हैं. ये शरीर में ताकत भी बढ़ाता है.

ऐसे होता है तैयार

उन्होंने बताया कि इसका पाउडर तैयार करने के लिए सतावर की जड़ का इस्तेमाल किया जाता है. सतावर की जड़ को जमीन से निकालकर किसी छांव वाली जगह में सुखाया जाता है. दो से तीन दिन में सुख जाने के बाद इसे किसी बर्तन या ओखली के प्रयोग से पाउडर तैयार किया जाता है. जिससे आप डब्बे में पैक कर रख सकते हैं.

ऐसे करें प्रयोग

उन्होंने कहा कि इसका प्रयोग करने के लिए आप सुबह शाम कभी भी कर सकते हैं. उन्होंने बताया की पानी के साथ एक चम्मच पाउडर को ले सकते हैं. खून की कमी होने पर एक हफ्ते में असर दिखना शुरू हो जाएगा. वहीं डिलीवरी वाली महिलाओं को दो से तीन दिन में असर दिखने लगेगा.

Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. garjachhattisgarhnews.com किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.(एजेंसी)

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स्वास्थ्य के लिए अच्छा है रक्त दान महादान यही है मानवता की पहचान डॉ हृदयेश कुमार

Posted on :17-Jun-2024
स्वास्थ्य के लिए अच्छा है रक्त दान महादान यही है मानवता की पहचान डॉ हृदयेश कुमार

फ़रीदाबाद हरियाणा : बल्लबगढ़ के तिरखा  कॉलोनी स्थित शिव मंदिर परिसर में स्वास्थ्य के लिए अच्छा है रक्त दान महादान के नाम से वीडियो कांफ्रेंस मीटिंग का आयोजन किया गया आयोजन ट्रस्ट के राष्टीय अध्यक्ष डॉ एम पी सिंह ने के द्वारा किया गया जिसमे राष्टीय अध्यक्ष डॉ एम पी सिंह ने अनेक प्रकार से लोगों को स्वस्थ बनाए रखने के लिए टिप्स दिए और जागरूक किया उन्होंने बताया कि स्वास्थ ही जीवन है और पर्यावरण संरक्षण भी हमारे स्वस्थ के लिए बहुत जरूरी है अखिल भारतीय मानव कल्याण ट्रस्ट के संस्थापक डॉ हृदयेश कुमार ने स्वास्थ के लिए सभी मानव जीवन जीने वाले लोगों से एक अपील करते हुए कहा कि 

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स्वास्थ्य के लिए अच्छा है रक्त दान महादान 

यही है मानवता की पहचान 

रक्तदान बहुत ही बड़ा दान होता है. जिससे आप एक साथ कई लोगों की जान बचा सकते हैं. हर साल जून की 14 तारीख को रक्‍तदान दिवस मनाया जाता है जिसका मकसद लोगों को रक्तदान के लिए प्रेरित करना है. क्या आप जानते हैं रक्तदान सिर्फ खून प्राप्त करने वालों के लिए ही फायदेमंद नहीं होता, बल्कि इससे रक्‍तदाता को भी कई सारे फायदे मिलते हैं. वैसे तो कोई भी स्वस्थ वयस्क पुरुष और महिला (18-65 साल) रक्तदान कर सकते हैं. पुरुष जहां हर 3 महीने में वहीं महिलाएं हर 4 महीने में रक्तदान कर सकती हैं.

लेकिन कुछ सिचुएशन में दोनों को ही रक्तदान करने की मनाही होती है। प्रेग्नेंट, स्तनपान कराने वाली और गर्भपात करवा चुकी महिला और दवाइयों का सेवन करने वाले लोग और वैक्सिनेशन के बाद और कमज़ोर लोग और अल्कोहल लेने के बाद रक्तदान नहीं कर सकते हैं   ब्लड डोनेशन से पहले डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है इस आयोजन में के एल अग्रवाल शिव शंकर राय, पंडित तरसेम वत्स और अनेक कॉलोनी निवासी लोग मौजूद रहे

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लीची को खाने से कई समस्याओं से मिलती है राहत...

Posted on :13-Jun-2024
लीची को खाने से कई समस्याओं से मिलती है राहत...

Health News : गर्मियों में मिलने वाला फल लीची को खाने से कई समस्याओं से राहत मिलती है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि सिर्फ लीची ही नहीं, बल्कि इसके बीज भी गुणों की खान होते हैं। इसके बीजों के भी अपने ढेरों लाभ हैं। आइए जानते हैं लीची के बीज के फायदे और इन्हें इस्तेमाल करने का तरीका- कुछ शोध से पता चलता है कि लीची के बीज का अर्क हार्ट हेल्थ पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। इसका अर्क कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित करने, सूजन को कम करने और हेल्दी ब्लड फ्लो को बढ़ावा देने में मदद करते हैं। साथ ही इससे हार्ट डिजीज का खतरा भी कम होता है। कुछ अध्ययनों से पता चला कि लीची के बीज का अर्क डायबिटीज से बचाने में भी मदद करता है। इसके अर्क में ब्लड शुगर के स्तर को नियंत्रित करने, इंसुलिन सेंसिटिविटी को बढ़ाने और डायबिटीज से जुड़ी जटिलताओं को कम करने की क्षमता होता है। ऐसे में यह डायबिटीज से पीड़ित या इस स्थिति के विकसित होने के जोखिम वाले व्यक्तियों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।

लीची के बीज के अर्क मजबूत एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं, जो इसे कई मायनों में फायदेमं बनाता है। ये अर्क पॉलीफेनोल्स, फ्लेवोनोइड्स और प्रोएंथोसाइनिडिन से भरपूर हैं, जो शरीर में शक्तिशाली एंटीऑक्सिडेंट के रूप में कार्य करते हैं। ये एंटीऑक्सीडेंट हानिकारक फ्री रेडिकल्स को खत्म करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जिससे ऑक्सीडेटिव स्ट्रेल कम होता है और कैंसर, डायबिटीज और दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा कम होता है। सेहत के लिए साथ-साथ लीची बालों के लिए भी अच्छी होती है, लेकिन क्या आपको पता है कि लीची के बीज त्वचा के लिए फायदेमंद होते हैं। लीची के बीज के अर्क में मौजूद पॉलीफेनोल्स की भारी मात्रा त्वचा की लोच और हाइड्रेशन में सुधार करने में मदद करता है। साथ ही यह झुर्रियों को कम करता है, जिससे स्किन युवा और चमकदार दिखती है। लीची के बीच के फायदों के बारे में तो आपने जान लिया, अब बारी है इसका इस्तेमाल करने के तरीके के बारे में जानने की।

आप लीची के बीज को अर्क के रूप में डाइट में शामिल कर सकते हैं। यह आमतौर पर कैप्सूल या पाउडर के रूप में मिलता है, जिससे इन्हें अपनी रूटीन में शामिल करना आसान हो जाता है।इसके अलावा आप घर पर खुद से लीची बीज का अर्क तैयार कर सकते हैं। इसके लिए बीजों को निकालकर अच्छी तरह साफ करें और सूखने दें। एक बार सूख जाने पर बीजों को ब्लेंडर या मसाला ग्राइंडर की मदद से बारीक पीस लें। घर में बने लीची के बीज के इस पाउडर को स्मूदी, दही में मिलाकर इस्तेमाल किया जा सकता है। बता दें कि गर्मियों में कई सारे फलों का स्वाद चखने को मिलता है। तरबूज से लेकर खरबूज तक, इस मौसम में ऐसे कई फल मिलते हैं, जो स्वादिष्ट होने के साथ ही हमें हाईड्रेट रखने में भी मदद करते हैं। लीची इन्हीं में से एक है, जो इस सीजन में कई लोगों का पसंदीदा फल होता है। लोग बड़ी ही बेसब्री से इसका इंतजार करते हैं। स्वादिष्ट होने के साथ ही यह ढेर सारे स्वास्थ्य लाभों से भी भरपूर होता है।(एजेंसी)

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खाने-पीने के बाद कुछ मीठा खाने की आदत बिगाड़ेगी आपकी सेहत

Posted on :11-Jun-2024
खाने-पीने के बाद कुछ मीठा खाने की आदत बिगाड़ेगी आपकी सेहत

Health News : खाने-पीने के बाद अक्सर लोगों को कुछ मीठा खाने की आदत होती है। यह आदत सेहत को नुकसान पहुंचाती है और इससे टाइप 2 डायबिटीज समेत मोटापा और फैटी लिवर की समस्या होने लगती है। मीठे की आदत को कंट्रोल करने का तरीका है कि जितना हो सके ऐसी चीजों को खरीदने से बचें। इसके अलावा आप अपने बेडरूम में इन चीजों को न रखें। ऐसे में, आपको इन्हें देख-देखकर खाने की तलब नहीं उठेगी। मीठा खाने की आदत के पीछे स्ट्रेस हार्मोन का बड़ा हाथ होता है, इसलिए आप जितना हो सके स्ट्रेस से दूर रहें। अगर आप कम से कम 8 घंटे की नींद लेते हैं, तो इससे भी तनाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है और आप शुगर क्रेविंग्स (मीठा खाने की आदात) से बच सकते हैं। 

खाने के एक घंटे बाद आप भरपूर मात्रा में पानी पिएं। इससे भी मीठा खाने की आदात दूर हो सकती है। इस तरीके से नींद आने तक आपका पेट भरा रहेगा और आप ऐसी चीजों के सेवन से बच सकेंगे। खूब कंट्रोल करने के बाद भी अगर मीठा खाने का मन करे, तो ऐसे में आप फ्रूट्स का सेवन करें। इनमें कैलोरी काफी कम होती है, जिससे आपको न तो वजन बढ़ने की समस्या होगी और न ही ये हार्ट हेल्थ के लिए नुकसानदायक होगा। इसमें मौजूद फाइबर बहुत देर तक आपके पेट को भरा रखते हैं और आप अनहेल्दी खाने से बच सकते हैं।(एजेंसी)

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गर्मी के मौसम में कुंदरू की सब्जी स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद...

Posted on :25-May-2024
गर्मी के मौसम में कुंदरू की सब्जी स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद...

Health News : गर्मी के मौसम में मिलने वाली सब्जियां कद्दू , लौकी, तुरई तो हमारे स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होती हैं। इन्हीं सब्जियों में कुंदरु भी शामिल है। जानते हैं गर्मी के मौसम में कुंदरू की सब्जी का सेवन करने से हमारे स्वास्थ्य को क्या फायदे मिलते हैं। विशेषज्ञ की मानें तो कुंदरु एक ऐसी सब्जी है, जिसका सेवन गर्मी के मौसम में हमारे स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद होता है। यह दिखने में परवल जैसा ही लगता है। लेकिन साइज और चौड़ाई में छोटा होता है। 

पौष्टिक गुणों से भरपूर कुंदरु हमें कई बीमारियों से भी बचाने में कारगर होता है। साथ ही वह बताती हैं कि इसमें भरपूर मात्रा में विटामिन (सी,बी,के), फाइबर, मिनरल, आयरन, कैल्शियम के साथ ही एंटी इन्फ्लेमेटरी और एंटीबैक्टीरियल, एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं। जो गर्मी के मौसम में हमारे स्वास्थ्य को दुरुस्त बनाए रखने में कारगर होते हैं। डायटीशियन एक्सपर्ट के अनुसार कुंदरू का सेवन करने से डायबिटीज, पाचन तंत्र, वजन कम करने इंफेक्शन से बचाने में, इम्यूनिटी मजबूत बनाने, ह्रदय रोग की समस्या, बीपी की समस्या से राहत दिलाता है। गर्मी के मौसम में कुंदरू की सब्जी बनाकर इसका सेवन करना चाहिए। जिससे जिससे हमारे स्वास्थ्य को कई फायदे मिलते हैं।

विशेषज्ञों की माने तो कुंदरू का सेवन करने से हमें किडनी स्टोन की समस्या से राहत मिलती है। इसमें मौजूद एंटी हाइपर ग्लाइसेमिक तत्व से ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल रहता है ।इसका सेवन करते समय ध्यान देना चाहिए कि कुंदरु कच्चा ही होना चाहिए। ज्यादा पक्का कुंदरू नहीं खाना चाहिए। मालूम हो कि गर्मी के मौसम में हमें अपने डाइट में कुछ ऐसी चीज शामिल करनी चाहिए, जो हमारे स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होती हैं। क्योंकि इस मौसम में खान पान का असर हमारे पाचन तंत्र पर पड़ता है। जिसके कारण हम बीमार होते हैं ।इसीलिए हमें पौष्टिक भोजन के साथ ही पौष्टिक सब्जियों की जरूरत होती है। जिससे हमारा स्वास्थ्य दुरुस्त रहता है।(एजेंसी)

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30 सेकंड की एक्सरसाइज से हार्ट हो जायेगा मजबूत, मोटापा होगा कम.....

Posted on :27-Apr-2024
30 सेकंड की एक्सरसाइज से हार्ट हो जायेगा मजबूत, मोटापा होगा कम.....

Health News : शारीरिक गतिविधि हर उम्र के लोगों के लिए फायदेमंद होती है, इसलिए सलाह भी दी जाती है कि सभी को कुछ न कुछ शारीरिक गतिविधि जरूर करनी चाहिए। हाल ही में 30 हजार लोगों पर रिसर्च में पाया गया है कि शाम 6 बजे से आधी रात के बीच की गई शारीरिक गतिविधि से मोटे लोगों की सेहत में सुधार होता है। जो लोग शाम को शारीरिक गतिविधि करते हैं, उनमें समय से पहले मृत्यु और हार्ट रोग से मृत्यु का जोखिम सबसे कम था।

एक रिसर्च में साबित हुआ है कि लोगों के रोजाना की कुल शारीरिक गतिविधि की तुलना में तीन मिनट की छोटी सी गतिविधि अधिक फायदा दे सकती है। लोग सिर्फ 3 मिनट की एक्सरसाइज से अपनी सेहत को सुधार सकते हैं।

जरुरी सूचना: इन एक्सरसाइज को करने से पहले, उन्हें करने का सही तरीका किसी फिटनेस ट्रेनर से पूछें या फिर यूट्यूब पर वीडियो देख सकते हैं।
हाई इंटेंसिटी इंटरवल ट्रेनिंग

स्टार जंप: बॉडी को गर्म करने और हार्ट रेट को बढ़ाने के लिए सबसे पहले 30 सेकंड तक स्टार जंप करें।

बॉडीवेट स्क्वॉट: यह लोअर बॉडी को एक्टिवेट करने के लिए एक्सरसाइज होती है इसलिए 30 सेकंड तक बॉडीवेट स्क्वॉट करें।

माउंटेन क्लाइंबर्स: कोर यानी पेट आसपास के मसल्स को सक्रिय करने के लिए 30 सेकंड तक इस एक्सरसाइज को करें और इसके साथ आपका मिनी एचआईआईटी वर्कआउट कंपलीट हो जाएगा।

इस सर्किट को तीन बार दोहराएं, प्रत्येक राउंड के बीच 20 सेकंड का ब्रेक लें।

कार्डियो

बर्पीज: यह काफी अच्छी एक्सरसाइज होती है। स्कॉट, जंप और प्लैंक तीन एक्सरसाइज मिलाकर बर्पीज करते हैं। इसके 1 रेप्स से 1.65 कैलोरी बर्न होती है। 30 सेकंड में जितनी हो सकें उतनी बर्पीज करें।

हाई नीज: बर्पीज के तुरंत बाद 30 सेकंड के लिए हाई नीज एक्सरसाइज करें। इस एक्सरसाइज में एक ही जगह पर खड़े होकर रनिंग करनी होती है। बस ध्यान रखें घुटने जितना हो सकें उतनी ऊपर तक आएं।

स्किपिंग: फिर 30 सेकंड तक स्किपिंग के साथ इस सेट को खत्म करें। इस आसानी से कहीं भी किया जा सकता है।

सर्किट पूरा करने के बाद 30 सेकंड के लिए आराम करें, फिर इसके कुल तीन राउंड करें।

कोर

प्लैंक: कोर यानी पेट के चारों ओर के मसल्स की स्टेबिलिटी बढ़ाने के लिए 30 सेकंड की एक्सरसाइज करें।

रशियन ट्विस्ट: इस एक्सरसाइज को करने के लिए फर्श पर बैठकर हल्का सा पीछे झुकना होता है और फिर पैरों को हल्का सा मोड़ते हुए हाथों से दोनों ओर फर्श को स्पर्श करना होता है।

लेग रेज: इस एक्सराइज को करने के लिए पीठ के बल लेटकर पैरों को सीधे चेस्ट तक लाना होता है। इस एक्सरसाइज को भी 30 सेकंड के लिए करें।
हर राउंड के बीच 20 सेकंड आराम करें और फिर इसे तीन बार दोहराएं।(एजेंसी)

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गर्मी में जादू है ये पौधा, घटा देगा घर का तापमान...

Posted on :23-Apr-2024
गर्मी में जादू है ये पौधा, घटा देगा घर का तापमान...

Best houseplant for Summer : अप्रैल के महीने में भीषण गर्मी के साथ लू चलना शुरू हो गई है. ऐसी तपती गर्मी से बचने के लिए लोग पंखा, एसी, कूलर से लेकर तमाम तरह के इंतजाम करते हैं. कोशिश करते हैं कि कैसे भी घर के अंदर का तापमान कम हो जाए और ठंडा महसूस हो लेकिन आपको बता दें कि कितने भी आर्टिफिशियल तरीके अपना लीजिए, प्राकृतिक चीजों की बराबरी नहीं हो सकती. बड़े-बड़े पेड़ ही नहीं, गमलों में उगाए जाने वाले पौधे भी इनसे इक्‍कीस ही साबित होते हैं. आज हम आपको एक ऐसे पौधे के बारे में बताने जा रहे हैं जो गर्मी में जादू की तरह काम करता है. छोटे से गमले में उगाया जाने वाला ये पौधा आपके घर को कूल-कूल बनाए रखने की ताकत रखता है.

दिखने में भी बेहद सुंदर ये पौधा कभी अफ्रीकी देशों में पाया जाता था, लेकिन इसके फायदे इतने कमाल के हैं कि अब यह भारत में भी आसानी से और बहुतायत में उगाया जाता है. यहां तक कि बड़े-बड़े इंटीरियर डिजाइनर्स से लेकर हॉर्टीकल्‍चर एक्‍सपर्ट तक इस पौधे की विशेषताओं के चलते इसे इनडोर लगाने की सलाह देते हैं.

प्‍लांट है स्‍नेक प्‍लांट यानि कि सांप का पौधा. इसका नाम स्‍नेक प्‍लांट इसलिए भी है क्‍योंकि इसकी पत्तियों पर वाइपर सांप के शरीर जैसी डिजाइन छपी होती है. स्‍नेक प्‍लांट को लेकर ऑल इंडिया इंस्‍टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद की ओर से दी गई जानकारी में बताया गया कि इस पौधे की देखभाल बहुत आसान है. इसमें ज्‍यादा पानी, खाद की भी जरूरत नहीं होती और इसे आसानी से इनडोर प्‍लांट के रूप में लगाया जा सकता है.

इस पौधे में कुछ खासियतें होती हैं, जैसे अन्‍य गहरे रंग की पत्तियों वाले पौधों में होती हैं. यह हवा को प्‍यूरिफाई करता है, हवा में से जहरीले प्रदूषण तत्‍वों को हटाता है. इसे घर में लगाने पर सांस लेने के लिए लोगों को शुद्ध हवा मिलती है. यह एक नेचुरल ह्यूमिडिफायर है. यानि कि उमस को कम करता है. इतना ही नहीं अगर इसे कमरे या घर में कई गमलों में लगाया जाए तो यह तापमान को भी कुछ हद तक मेनटेन करने का काम करता है.

प्रदूषण के खिलाफ काम करने वाला ये पौधा एलर्जिक तत्‍वों को भी सोख लेता है. यह मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य और शांति में कारगर है. इसकी खूबसूरती की वजह से भी इसे देखकर अच्‍छा महसूस होता है. इसके अलावा इसे लेकर कई तरह वास्‍तु संबंधी बातें भी सामने आती हैं. जिसमें इसकी पत्तियों की डिजाइन की वजह से इसे लकी पौधा माना जाता है.

हालांकि एक्‍सपर्ट की मानें तो आप गर्मी के मौसम में अपने घर में स्‍नेक प्‍लांट लगा सकते हैं और इसके जादुई असर को महसूस भी कर सकते हैं. खास बात है कि यह पौधा एक बार लगाने पर करीब 10-12 साल तक लिए आसानी से चलता रहता है. इसमें ज्‍यादा मेहनत करने की भी जरूरत नहीं होती. कई बार यह 20 साल तक भी जिंदा रह लेता है.

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भोजन के बाद भूल से भी ना खाएं ये चीजें, सेहत को पहुंच सकता है नुकसान...

Posted on :17-Apr-2024
भोजन के बाद भूल से भी ना खाएं ये चीजें, सेहत को पहुंच सकता है नुकसान...

Health News : गर्मियों के सीजन में शुद्ध खाने पीने का ध्यान रखना पड़ता है. ऐसे में शरीर को तमाम बीमारियों से बचाने के लिए खान पान का ध्यान रखना बेहद जरूरी भी है. एक तरफ लोग तमाम बीमारियों से बचने के लिए कई अंग्रेजी दावाओं का इस्तेमाल करते हैं तो, वहीं आज भी कई ऐसे चिकित्सक है जो आयुर्वेदिक तरीकों से लोगों का इलाज करते हैं. वह उन्हें आयुर्वेद का सलाह देते हैं. गोरखपुर धर्मशाला पर मौजूद आयुर्वेद चिकित्सक घनश्याम वैद्य बताते हैं कि, इन गर्मियों के सीजन में शरीर को स्वस्थ रखने और एलर्जी को दूर करने के लिए, आयुर्वेद के ‘विरुद्ध आहार’ का पालन करना बेहद जरूरी है. जिससे शरीर की बीमारियों कोसों दूर रहेंगी.

अपने शरीर को स्वस्थ रखने के लिए स्वस्थ खान-पान का पालन करना बेहद जरूरी है. ऐसे में गर्मियों के सीजन में एलर्जी और भीषण गर्मियों से बचने के लिए, आयुर्वेद के ‘विरुद्ध आहार’ का पालन करना ही चाहिए. पिछले 12 सालों से आयुर्वेद तरीके से लोगों का इलाज करने वाला घनश्याम वैद्य बताते हैं कि, गर्मियों के सीजन में विरुद्ध आहार का पालन करना बेहद जरूरी है. विरुद्ध आहार के जरिए हम जान सकते हैं कि, कब और किस समय क्या खाना चाहिए. वैद्य बताते हैं कि, सत्तू के साथ दाल का सेवन न करें, दूध के साथ नमक का सेवन न करें, खाने के बाद कभी आइसक्रीम ना खाएं, दही में नमक का प्रयोग ना करें, ऐसी चीजे आयुर्वेद में विरुद्ध आहार के समान होती है.

इसके प्रयोग से शरीर को मिलेगा ताकत

डॉक्टर घनश्याम वैद्य बताते हैं कि, हमें अपने शरीर को ताकतवर और शुद्ध बनाने के लिए गाय के घी का सबसे ज्यादा इस्तेमाल करना चाहिए. वह साथ ही कोशिश करें की, हर टाइम गर्म भोजन ही करें तो वह हमारे शरीर को कई पौष्टिक चीज प्रदान करता है. जिससे हमारा शरीर ताकतवर होता है. वह खाना आसानी से डाइजेस्ट हो जाता है. खासकर के सुबह और शाम गरम भोजन के साथ गाय का घी जरूर इस्तेमाल करें, जो आपके शरीर के लिए बेहद लाभदायक होगा.

Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. garjachhattisgarhnews किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.

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डायबिटीज मरीजों के लिए है रामबाण ये सब्जी, जानें 5 जबरदस्त फायदे...

Posted on :12-Apr-2024
डायबिटीज मरीजों के लिए है रामबाण ये सब्जी, जानें 5 जबरदस्त फायदे...

Chichinda Vegetable Benefits : कई तरह की सब्जियां होती हैं. इनमें से कुछ का लोग सेवन करते हैं, कुछ के बारे में जानते हैं और कुछ ऐसी सब्जियां हैं जिसका नाम तो सुना होता है लेकिन कभी स्वाद नहीं चखा. ऐसी ही एक सब्जी है चिचिंडा. चिचिंडा देखने में बिल्कुल सांप जैसी लगती है. यह पतली और लंबी होती है. हरे रंग की इस सब्जी के छिलके पर सफेद रंग की धारी बनी होती है, इसलिए यह सांप की तरह लगती है. चिचिंडा को इंग्लिश में स्नेक गार्ड (Snake Gourd) कहते हैं. चलिए जानते हैं चिचिंडा खाने के सेहत लाभ के बारे में.

चिचिंडा में मौजूद पोषक तत्व- इसमें एंटीऑक्सीडेंट भरपूर होता है. एंटी-इंफ्लेमेटरी, एंटी-डायबिटिक, एंटी-पाइरेटिक, एंटी-माइक्रोबियल भी होती है चिचिंडा. ये बुखार, पैथोजेंस, ब्लड शुगर लेवल, इंफ्लेमेशन, फ्री रेडिकल डैमेज आदि से बचाते हैं. इसके अलावा इसमें प्रोटीन, फाइबर, फैट्स, आयरन, पोटैशियम, मैग्नीशियम, कार्बोहाइड्रेट्स, विटामिन ए, बी6, सी, ई और कई तरह के मिनरल्स भी होते हैं. इसमें बायोएक्टिव प्लांट कम्पाउंड्स फेनोलिक्स, Cucurbitacins होते हैं जो आपके संपूर्ण शारीरिक और मेंटल हेल्थ को बूस्ट करते हैं.

जिन लोगों को डायबिटीज है, उन्हें भी चिचिंडा की सब्जी का सेवन करना चाहिए. इस सब्जी में एंटी-डायबिटिक तत्व होते हैं जो मधुमेह को मैनेज करता है और ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करता है. यदि आपका पाचन तंत्र खराब रहता है तो आप चिचिंडा की सब्जी खा सकते हैं. यह गट हेल्थ (Gut health) के लिए बेहद फायदेमंद सब्जी है. फाइबर होने के कारण यह बाउल मूवमेंट को सही बनाए रखता है जिससे कब्ज की समस्या नहीं होती है. आपको कब्ज की शिकायत रहती है तो आप फाइबर से भरपूर सब्जियों का सेवन करें. इसमें स्नेक गार्ड जरूर शामिल करें.

गर्मी के दिनों में भी आप चिचिंडा की सब्जी बनाकर खाएं. ऐसा इसलिए क्योंकि यह शरीर को हाइड्रेटेड बनाए रखता है. इसके सेवन से शरीर में पानी की कमी नहीं होती है. इतना ही चिचिंडा में कैलोरी की मात्रा भी काफी कम होती है. ऐसे में इसके सेवन से वजन बढ़ने का रिस्क नहीं होता है.

चूंकि, चिचिंडा में एंटीऑक्सीडेंट विटामिन सी होता है इसलिए इसके सेवन से रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है. ये सब्जी ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल आदि को कंट्रोल करके हार्ट की बीमारियों को भी होने से बचाती है. आयोडीन होने के कारण ये सब्जी थायरॉइड फंक्शन को भी ठीक रखती है.(एजेंसी)

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समाज सेवा के साथ स्वस्थ पर भी विशेष ध्यान दे रहे हैं ट्रस्ट के माध्यम से :डॉ. हृदयेश कुमार

Posted on :01-Apr-2024
समाज सेवा के साथ स्वस्थ पर भी विशेष ध्यान दे रहे हैं ट्रस्ट के माध्यम से :डॉ. हृदयेश कुमार

स्वस्थ जीवन के लिए सिर्फ हेल्दी फूड ही नहीं बल्कि अच्छी नींद लेना भी बहुत जरूरी है:डॉ. हृदयेश कुमार 

फरीदाबाद से सुनील जांगडा की रिपोर्ट

फरीदाबाद : स्वस्थ जीवन के लिए सिर्फ हेल्दी फूड ही नहीं बल्कि अच्छी नींद लेना भी बहुत जरूरी है। नींद के इसी महत्व को समझाने के उद्देश्य से हर साल मार्च के तीसरे शुक्रवार को‘वर्ल्ड स्लीप डे’ मनाया जाता है। अपर्याप्त नींद के कारण होने वाली हृदय संबंधित समस्याओं के बारे में जानकारी देते हुए अखिल भारतीय मानव कल्याण ट्रस्ट के संस्थापक डॉ.  हृदयेश कुमार  ने बताया कि जिस तरह भोजन हमारे शरीर की जरूरत है,ठीक वैसे ही पर्याप्त मात्रा में नींद लेना भी शरीर के लिए बहुत आवश्यक है।

अगर नींद पूरी होती है तो व्यक्ति शारीरिक एवं मानसिक रूप से रिलैक्स महसूस करता है और ब्लड प्रेशर भी ठीक बना रहता है। अगर कोई व्यक्ति पर्याप्त मात्रा में नींद नहीं लेता है तो उसका ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है। कुछ व्यक्ति नींद की बीमारी, ( ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया नामक बीमारी ),से पीड़ित होते हैं। एैसे व्यक्ति की नींद रात में बार-बार टूटती है। स्लीप डेफिशियेंसी ब्लड प्रेशर बढ़ने और कई बार ब्लड प्रेशर अनियंत्रित होने का एक बहुत बड़ा कारण बन जाता है।

ब्लड प्रेशर के अनियंत्रित होने के कारण हार्ट की हेल्थ पर बुरा असर पड़ता है। जिन लोगों का हार्ट फंक्शन कमजोर है, उन्हें हार्ट फेलियर की आशंका ज्यादा बढ़ जाती है। ब्लड प्रेशर के अनियंत्रित होने के कारण हार्ट अटैक, हार्ट की नसों में ब्लॉकेज, किडनी फेलियर का खतरा बढ़ सकता है।

रात के समय लम्बे समय तक मोबाइल फोन या किसी अन्य गैजेट के इस्तेमाल करने से भी पर्याप्त मात्रा में नींद नहीं आती हैं तो इससे आपके हार्ट पर स्ट्रेस (जोर) पड़ता है। स्ट्रेस बढ़ने के मुख्य कारण आपके शरीर से कुछ ऐसे हार्मोन का निकालना है जो ब्लड प्रेशर को बढ़ाते हैं। सामान्य तौर पर 24 घंटे में व्यक्ति को 7-8 घंटे की नींद जरूर लेनी चाहिए। अगर किसी व्यक्ति को नींद कम आती है तो वह चिंतित हो जाता है। कई बार कुछ लोग नींद की दवाई का सहारा लेते हैं जिसका शरीर पर खराब असर पड़ता है।
व्यक्ति को इस दवाई की लत पड़ सकती है।

नींद भूख की तरह शरीर की जरूरत होती है,जितना ज्यादा बॉडी थकेगी उतना ज्यादा खाने एवं नींद मांगेगी। नींद को बढ़ाने के लिए नींद की दवाओं की बजाय फिजिकल एक्टिविटी के माध्यम से बॉडी को थकाने की कोशिश करनी चाहिए। रोजाना एक्सरसाइज करें,इससे आपका शरीर थकेगा और नींद लंबी एवं गहरी आएगी। हार्ट मरीजों के लिए एक्सरसाइज करना जितना जरूरी है,पर्याप्त मात्रा में नींद लेना भी उतना ही आवश्यक है। ठीक से नींद न लेने के कारण हार्ट की नसों में ब्लॉकेज के मरीज को हार्ट अटैक का जोखिम बढ़ सकता है इसलिए हृदय मरीजों को भी पर्याप्त मात्रा में नींद लेनी चाहिए। स्मोकिंग करने से आपकी नींद और भूख दोनों पर बुरा असर पड़ता है।

अगर आप रात में सोने एवं खाना खाने से पहले स्मोकिंग करते हैं तो आपकी भूख और नींद दोनों खराब होंगी। नींद के डिस्टर्ब होने से ब्लड प्रेशर बढेगा और आपके हार्ट पर स्ट्रेस पड़ेगा इसलिए स्मोकिंग करने से बचें।

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सूर्यास्त बाद घर की दहलीज पर बैठना चाहिए या नहीं?, जानें शाम में 5 कामों की है मनाही

Posted on :30-Mar-2024
सूर्यास्त बाद घर की दहलीज पर बैठना चाहिए या नहीं?, जानें शाम में 5 कामों की है मनाही

Astro Tips : हिन्दू धर्म में ज्योतिषशास्त्र की विशेष मान्यता है. तमाम ऐसे काम हैं, जिनको करने न करने का जीवन में प्रभाव देखने को मिलता है. हालांकि, कुछ भ्रांतियां भी हैं, जिनको लेकर लोग अक्सर दुविधा में रहते हैं. ऐसी ही भ्रांति है कि सूर्यास्त के बाद घर की दहलीज पर बैठना चाहिए या नहीं? झाड़ू लगाएं या नहीं? शाम को तुलसी पर जल चढ़ाएं या नहीं? इन सवालों पर ज्योतिष आचार्यों का क्या मत है, सबसे इनको जान लेते हैं. इनके बारे में उन्नाव के ज्योतिषाचार्य पं. ऋषिकांत मिश्र शास्त्री ने विस्तार से बताया-

पं. ऋषिकांत मिश्र शास्त्री बताते हैं कि, हिन्दू धर्म में कई कामों को सूर्यास्त के बाद करने की मनाही होती है. सनातन धर्म में सूर्य को देवता माना गया है, इसलिए शास्त्रों में सूर्योदय और सूर्यास्त को लेकर कुछ नियम बताए गए हैं. इन बातों को नजरअंदाज करना अशुभ माना जाता है. ज्यादातर बड़े-बुजुर्गों के मुंह सुना होगा कि सूर्योदय के बाद ऐसा काम नहीं करना चाहिए.

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घर की दहलीज पर ना बैठें: पं. ऋषिकांत मिश्र शास्त्री के मुताबिक, किसी को भी शाम के वक्त घर की दहलीज नहीं बैठना चाहिए. सूर्यास्त के बाद दहलीज पर बैठने को अशुभ माना गया है. मान्यता है कि ऐसा करने से माता लक्ष्मी आपके घर में प्रवेश नहीं कर पातीं. भूलकर भी शाम के समय सीढ़ी पर न बैठें. साथ ही शाम में दरवाजा भी खुला रखना चाहिए.

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सूर्यास्त के बाद नहीं सोएं: ज्योतिषाचार्य के अनुसार, माना जाता है कि यदि कोई व्यक्ति शाम के वक्त सोता है, तो वह कई रोगों का शिकार हो जाता है. साथ ही शाम के समय सोने वाले व्यक्ति की आयु भी कम होती है. ऐसे में सूर्यास्त के समय सोना नहीं चाहिए. ऐसा करना बेहद अशुभ माना जाता है.

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झाड़ू न लगाएं: हिंदू धर्म में सूर्यास्त के बाद यानी संध्या के वक्त घर के अंदर झाड़ू नहीं लगाया जाता है. मान्यता है कि शाम के समय घर के अंदर झाड़ू लगाने से अशुद्धियां आती हैं और देवी लक्ष्मी रुष्ट हो सकती हैं, इसलिए शाम को घर में झाड़ू नहीं लगाना चाहिए.

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तुलसी को जल न चढ़ाएं: धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, शाम के समय तुलसी में जल नहीं चढ़ाना चाहिए. साथ ही इस वक्त तुलसी की पत्तियों को भी नहीं तोड़ना चाहिए. यह अशुभ माना जाता है. माना जाता है कि ऐसा करने से देवी लक्ष्मी हमेशा के लिए घर से चली जाती हैं.

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पैसों के लेन-देन से बचें: हिंदू धर्म की मान्यताओं के मुताबिक, सूर्यास्त के बाद भूलकर भी पैसों का लेन देन नहीं करना चाहिए. माना जाता है कि शाम के समय पैसों के लेनदेन से वो पैसा कभी वापस नहीं आता. यह अशुभ माना जाता है.(एजेंसी)

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रोजाना सिर्फ 11 मिनट तक तेज चलने से कई सारी बीमारियों का जोखिम कम

Posted on :21-Mar-2024
रोजाना सिर्फ 11 मिनट तक तेज चलने से कई सारी बीमारियों का जोखिम कम

-अध्ययन में फिजिकल एक्टिविटी पर दिया गया जोर

Health News : शोधकर्ताओं का दावा है कि रोजाना सिर्फ 11 मिनट तक तेज चलने से कई सारी बीमारियों का जोखिम कम किया जा सकता है। कैंब्रिज यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं के द्वारा की गई इस स्टडी में फिजिकल एक्टिविटी पर जोर दिया गया है। शोधकर्ताओं का कहना है कि फिजिकल एक्टिविटी जैसे ब्रिस्क वॉक (यानी के तेजी से चलना या वॉक करना) दिल की बीमारियां, स्ट्रोक और कैंसर का खतरा कम करती है। एक स्टडी के अनुसार, हर व्यक्ति को रोज 11 मिनट तेज या मध्यम और हफ्ते में 75 मिनट तक ज्यादा तीव्रता वाली ब्रिस्क वॉक करनी चाहिए। क्योंकि दुनिया में दिल की बीमारी और स्ट्रोक मौत का मुख्य कारण हैं। दिल से जुड़ी बीमारियों के कारण दुनिया भर में 2019 में करीबन 1.79 करोड़ मौतें हुई थी जबकि कैंसर 2017 में 96 लाख मौतों के लिए जिम्मेदार था।

ऐसे में शोधकर्ताओं का मानना है कि फिजिकल एक्टिविटी मुख्य तौर पर ब्रिस्क वॉक करने से इन बीमारियों का खतरा कम होगा। ब्रिटेन की नेशनल हेल्थ सर्विस का कहना है कि हर व्यक्ति को हफ्ते में कम से कम 150 मिनट तक मध्यम-तीव्रता वाली 75 मिनट तक शारीरिक गतिविधि करनी चाहिए। इस अध्ययन में शोधकर्ताओं ने 3 में से 2 लोगों ने हफ्ते में 150 मिनट से ज्यादा मध्यम-तीव्रता वाली एक्सरसाइज की और 10 में से एक ने हफ्ते में 300 मिनट से ज्यादा की फिजिकल एक्टिविटी करने के लिए कहा। ऐसे में शोधकर्ताओं ने देखा जिन लोगों ने 150 मिनट से ज्यादा की मध्यम तीव्रता वाली एक्सरसाइज की थी उनमें किसी बीमारी के होने का या जल्दी मौत का खतरा काफी हद तक कम था।

इतना ही नहीं हर हफ्ते 75 मिनट तक फिजिकल एक्टिविटी करने वाले लोगों में भी मौत का जोखिम करीबन 23 प्रतिशत तक कम हुआ। जिन लोगों ने फिजिकल एक्टिविटी की उनमें कैंसर का खतरा 14-26 प्रतिशत तक कम देखा गया। ऐसे में स्टडी का कहना है कि कोई भी फिजिकल एक्टिविटी नहीं करने से बेहतर है कि यदि आप हफ्ते में 75 मिनट तक कोई फिजिकल एक्टिविटी करते हैं तो कई गंभीर बीमारियों का खतरा कम हो सकता है।इस स्टडी में पता चला कि हर हफ्ते सिर्फ 75 मिनट फिजिकल एक्टिविटी करने से दिल की बीमारी के पैदा होने का खतरा 17 प्रतिशत तक कम होता है। इसके अलावा कैंसर का जोखिम भी 7 प्रतिशत तक कम होता है।(एजेंसी)

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